Wednesday, February 2, 2011

Aise gujra pahla anubhav

Mr. Gandhi baby


ऐसा गुजरा पहला अनुभव

जब में छोटा बच्चा था अक्ल का थोडा कच्चा था . जब में पहली बार बस में बैठा तो मुझे नहीं पता था की सीट पे बैठा जाता है या नीचे

में पहली बार नीचे ही बैठ गया तो भाई बोला सीट पे बैठो. तब पता चला की सीट किस लिए होती है.

जब में छोटा बच्चा था अक्ल का थोडा कच्चा था. जब मैंने पहली बार फिल्म देखी फिल्म का नाम था होली आई रे मुझे पता नहीं था फिल्म क्या होती है

जब मैंने परदे पर देखा तो बड़े बड़े आदमी देख के डर गया . तो भाई बोला दरो नहीं असली नहीं है थोड़ी देर के बाद कुछ आदमी दौड़ रहे थे में सीट से

खड़ा होकर भागने वाला था तब भाई ने रोका बोला डरो नहीं वही रहेगा यहाँ नहीं तब पता चला की फिल्म क्या होती है

जब में छोटा बच्चा था अक्ल का थोडा कच्चा था. एक बार में मंदिर में बैठा था तभी कुछ लोग बैठे थे पूजा चल रही थी देवी नाच हो रहा था एक आदमी के

ऊपर देवी आ गई वो कूदने लगा में डर गया पर बाद में लोगों ने बताया ये तो सब नाटक होता है इनका असली नहीं.

जब में छोटा बच्चा था अक्ल का थोडा कच्चा था में भैंस को लेके घास के लिए जाता था कुछ सैतान बच्चे भी आते थे वो मुझे लड़ने के लिए उकसाते थे २ लड़के

छोटे थे मेरे बराबर के एक मुझसे बड़ा एक दिन में एक एक करके दोनों से लड़ गया दोनों को हरा दिया तो तीसरे दिन बड़े लड़के ने मुझे लड़ने के लिए उकसाया

में उससे भी लड़ गया उसने मुझे ऐसा जोर से पटका ऐसा लगा जान निकल जाएगी उठने के बाद मैंने निर्णय लिए अब कभी नहीं लडूंगा.

अगला भाग आगे.