Monday, August 20, 2012

True Story of animal crime

बलि

बात बहुत पुरानी है पर सच है मै उस समय बहुत छोटा था हमारे घर से थोड़ी दूर पर एक मंदिर था जो अब भी है वो मंदिर दुर्गा जी का मंदिर है मै कभी कभी उस मंदी में जाया करता था वहा पर माता जी को खुश करने के लिए लोग भजन कीर्तन नाच और गाना किया करते थे | मै भी वहा जाकर आनंदित होता था | पर कुछ सिरफिरों का दिमाग फिर गया था और वो माता जी को खुश करने के लिए बलि के बारे में सोचा करते थे एक दिन उन्होंने एक बकरे का बलि देने का निश्चय किया | वो सब लोग हमारे घर से कुछ दुरी पर ही रहते थे |

मुझे इस सब के बारे में मालूम न था मै तो उस दिन भी नाच गाना समझकर मंदिर गया |


नाच गाना सुरु हो गया फिर थोड़ी देर बाद मंदिर में एक बकरा लाया गया बकरे को हल्दी के पानी से नहलाया गया फिर उसे दूध पिलाया गया मै अनजान सा बकरे को देख के आनंदित होता रहा की बकरे की अच्छी खातिरदारी हो रही है | एक घंटे तक नाच गाना और भजन कीर्तन चला फिर एक आदमी धारदार गडाषा लेकर आया दो लोगो ने बकरे को गिरा दिया फिर उस आदमी ने दो बार जोर से बकरे के गर्दन पर वार किया बकरा बहुत जोर से चिल्लाया और उसका काम तमाम कर दिया मै आखिरी दृश्य देख कर दहल चुका था और उसके बाद कभी मंदिर में नाच गाना देखने नहीं गया |

५ साल बाद वो आदमी मुझे मिला जिसने बलि दी थे मैंने उससे प्रश्न किया तुमने बलि क्यों दी तो उसने कहा माता को खुश करने के लिए | मैंने कहा माता खुश हो गई क्या वो बोला माता  कहाँ खुश हुई ऊपर से दो दिन बाद मेरे घर में आग लग गई और सब कुछ जल कर राख हो गया.|

मुझे जबाब मिल चुका था की बलि से माता खुश नहीं बल्कि नाराज हो जाती है.| जय हो माँ दुर्गे की |