Sunday, May 27, 2012

Dard E Tanhai

तन्हाई

Dard E Tanhai,Alone pain

मुझे लगता है की मेरे पास कोई है जो हमेशा तो नहीं पर अकेले में मिलती है |
यह और कोई नहीं मेरी तन्हाई है ,मेरा हमदम दोस्त नहीं जनता मै कौन है |
पर ये तन्हाई करमजली मेरी सारी दास्ताँ बयां करती है |
तन्हाई मुझसे कहती है ये करलूं वो करलूं कभी ख़ुशी के पल तो कभी आंसू भर लूं |
मेरी तन्हाई मुझे रोज सताती है , न चाहते हुए भी होने का अहसाश कराती है |
कभी बिस्तर पर तो कभी कंप्यूटर स्क्रीन पर भी नजर आती है |
कभी कभी तो भीड़ भाड़ में भी नजर आती है |
लाख कोसिस की कि दूर हो जाये मेरी तन्हाई |
पर जितना दूर करता हूँ उतने करीब हो जाती है तन्हाई |
एक दिन मेरी तन्हाई से हो गया मेरा समझौता |
तन्हाई ने कहा मेरे यार लगता है तुम हो मुझसे बहुत दुखी |
तुम्हे तुम्हारी तन्हाई का वास्ता बताती हूँ एक रास्ता |
तन्हाई के कहने पर मैंने कुछ ही दिनों में करली शादी |
मैंने तन्हाई का अदा किया सुक्रिया कि उसने मुझे नै राह दी |
कुछ दिन तो बहुत अच्छा लगा बिना तन्हाई के |
अभी तक कानो में गूँज रहे थे सुर सहनाई के |
सब कुछ मानो स्वर्ग सा मिल गया |
होठों में मुस्कराहट दिलों में फूल खिल गया |
पर पता नहीं क्यों इन सोरसराबों के बीच मै अपनी तन्हाई ढूंढ रहा था |
आज पहली बार मुझे तन्हाई के बिना थोडा बुरा लग रहा था |
मै अपनी तन्हाई तलाशने लगा पर उसका कहीं भी नामोंनिशा न था |
अब तो तन्हाई मेरे सपने में भी आने से कतराने लगी थी |
पर मुझे एक दिन बड़ा अजीब सा सपना आया |
मैंने देखा जिसकी मुझे तलाश है वह मेरे साथ नहीं बल्कि मेरी पत्नी का पास है |
वह भी हमेशा उसके साथ नहीं रहती थी, कभी कभी जब में ऑफिस में होता ,या तब जब मै किसी काम से बहार रहता था |
जिंदगी कि भागदौड़ बढती जा रही थी , तन्हाई से दुश्मनी बढती जा रही थी |
अब मै उसे ढूंढता पर वह दूर और दूर होती जा रही थी |
अब मेरे पास थे तो बस तन्हाई के दुश्मन ,
और मुझे अभी भी तन्हाई कि तलाश थी | तनही कि तलाश थी |