Saturday, November 22, 2014

Municipality Office-Story of correction in Birth Certificate

मुन्सिपलिटी ऑफिस 

मैं  आप लोगों से १ घटना बताना चाहता हूँ जो हाल ही में घटित हुई मुझे मेरे बेटे की जन्म सर्टिफिकेट में एक सुधार करवाना था स्लैश के जगह पर १ हो गया था     ।  मै  पूरी बातें लिखता हूँ विस्तार से । 
मुन्सिपलिटी अफसर - क्या काम है । 
मैं  - सर एक करेक्शन करवाना है । 
मुन्सिपलिटी अफसर - ठीक है दिखाओ । 
मै - ये लीजिये सर । 
मुन्सिपलिटी अफसर - कल आ जाओ रिकॉर्ड चेक करके बताऊँगा । 

अगले दिन में फिर गया । 

मुन्सिपलिटी अफसर -  देखो मैंने रिकॉर्ड चेक कर लिया है फॉर्म में गलती थी । हॉस्पिटल वालों ने गलत लिख दिया था । 
मैं - ठीक है सर तो अब करेक्ट कर दीजिये । 
मुन्सिपलिटी अफसर -  ठीक  है पर एक तुम्हारा पासबुक और तुम्हारी   पत्नी के बैंक   पासबुक का ज़ेरोक्स लगेगा । कल ले के आ जाओ । 

मै  घर आ गया पता चला वाइफ का तो बैंक अकाउंट ही नहीं है फिर मैंने वाइफ का तो बैंक अकाउंट खुलवाया । 

और एक सप्ताह के बाद फिर गया मुन्सिपलिटी ऑफिस। 

मैं -  सर , लीजिये  सभी डॉक्यूमेंट के साथ फॉर्म रेडी है । 

मुन्सिपलिटी अफसर - पर आज बड़े साहब छुट्टी पर है सोमवार को आ जाओ । 

फिर मैं  बहुत परेशान हो गया और सोमवार को गया । 

मुन्सिपलिटी अफसर - अरे आज आप आ गए साहब तो आज भी नहीं आये । 

मैं - सर, प्लीज आज करवा दीजिये न । 

मुन्सिपलिटी अफसर -  देखो वो सब ठीक है अगर कंप्यूटर ऑपरेटर को चाय पानी दूँ तो सायद हो जाये । 

मैं -  ठीक है सर ले लीजिये पर करवा दीजिये मैं  पहले से ही कई लीव ले चूका हूँ । 

फिर मुन्सिपलिटी अफसर मुझे दूसरे कमरे में ले गया  

मुन्सिपलिटी अफसर - देखो ३०० रूपये लगेंगे । 

पर मेरे पास ५०० का नोट था मैंने दिया तो उसने सारा रख लिए मांगने पर भी २०० रूपये वापस नहीं किये । 

पैसे लेने के बाद भी दो दिन बाद मेरा काम हुआ । 

जब मैंने अपने छुटटी और किराया भाड़ा जोड़ा तो पुरे ५००० रूपये का नुकसान हो चूका था केवल एक स्लैश करेक्शन  के लिए । ये तो है मुन्सिपलिटी और सरकारी ऑफिस का हाल । ये वाकया मुंबई का  है ।  अगर आप ये लेख पढ़ेंगे तो हो सकता है आप के कुछ पैसे बच जाएँ । अगर आप को  जरूरत पड़े तो यदि पैसे  देने हो तो पहले दिन ही  दे देना  नहीं तो तो कानून का सहारा ले । । पर कानून भी तो सरकारी है । आम आदमी जाये  कहा ।