दुनिया में इंसान की मजबूरी ही इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी होती है

मजबूरी कैसी कैसी

इस दुनिया में मजबूरी कैसी कैसी है जो इंसान को कितना कमजोर बना देती है । मजबूरी इंसान को सहनशील बना देती है । मजबूरी का उदहारण कही न कही कभी न कभी मिलता ही रहता है ।

एक बार मै ट्रेन में जा रहा था ट्रेन  में बहुत भीड़ थी जिनकी टिकट कन्फर्म थी उनकी कोई मजबूरी नहीं थी पर जिनकी टिकट वेटिंग में थी उनकी हर जगह मजबूरी थी । पहले टीटी आया सब वेटिंग वालों से बोला सब जनरल डिब्बे में जाओ नहीं तो १०० रुपए दो जिन्होंने पैसे दे दिए उन्हें जनरल डिब्बे में नहीं जाना पड़ा बाकी सबको जाना पड़ा ।

टीटी के जाने के बाद पुलिसः  वाले  आये और सब वेटिंग वालों से २० रुपए लिए।  भारितीय रेल  का बजट तो हर साल बड़े तरीके से पेश होता है पर कन्फर्म टिकट भी मिल जाये तो समझो गंगा नहा  लिया ।

एक बार सरकार यदि सारे बाते छोड  के कन्फर्म टिकट का बजट पेश  कर दे तो सबसे  भारी बजट कहलायेगा ।

सरकार भी क्या करे ये सरकार की मजबूरी है हम क्या करें ये हमारी मजबूरी है । बड़े जुगाड़ के बाद ही कन्फर्म टिकेट मिलता है ।

कोटा होना कुछ को तो सुकून देता है पर कुछ लोगों के लिए मजबूरी । ।  हिंदुस्तान कई वर्ष तक गुलाम था ये हिंदुस्तान की मजबूरी थी हिंदुस्तान आजाद हुआ ये अंग्रेजों की मजबूरी थी ।

वेटिंग टिकट वाले इतने सहनशील होते  है की कोई उनकी टांग के ऊपर निकल जाये तो भी कुछ  नहीं कहते क्यों की वो मजबूर होते है । जिंदगी में मजबूरी जितनी कम  हो जिंदगी उतनी ही सरल हो जाएगी इसलिए हमें मजबूर ख़त्म करने की हर मुमकिन कोसिस करनी चाहिए ।

हम सभी अपने जीवन  में किसी  न किसी मजबूरी से गुजर रहे है ये मजबूरी कब ख़त्म होगी ये तो आने वाला समय ही तय करेगा ।