Sunday, December 25, 2016

Anand Mela clips at Mumbai

आनंद मेला का औयोजन हर साल  दिसम्बर के महीने में होता  है । में इस वीडियोस के जरिये कुछ झलक पेश करता हूँ । बच्चे खूब मजे करते है । यह क्लिप २०१६ साल की है




















Sunday, September 25, 2016

सरोज एक संघर्ष

सरोज

सरोज एक संघर्ष का  नाम था ? सरोज एक लड़की थी जिसकी शादी के १ साल ही हुए थे और उसके पति की डेथ हो गई थी । सरोज अब टूट सी गई थी । अडोस पड़ोस  के लोगों  ने समझाया जिंदगी जीने  के लिए है उसे जाया मत करो ।

सरोज १० वी  पास थी तो उसने अपनी पढाई फिर से शुरू की किसी तरह से १२ वी  की परीक्षा पास की फिर टीचींग  का कोर्स कर लिया और एक दिन अध्यापिका बन गई  ।

जिंदगी अब कुछ अच्छी  लगने लगी । घर में कोई जेंट्स नहीं था और सभी बहनो की शादी  थी । खेती भी थी । सरोज की एक बहन की ४ बेटी थी । सरोज की बहन का नाम सुमित्रा था ।

सुमित्रा का पति जुवारी था एक दिन वो सब कुछ जुए  में हार गया । तो सुमित्रा भी सरोज के साथ रहने लगी एक दिन सुमित्रा के पति की भी डेथ  हो गई  क्योंकि उसे कैंसर हो गया था ।

अब सरोज ने सुमित्रा और उसकी बेटियों की जिम्मेदारी अपने सर  ले लिया । सबको पढ़ाया लिखाया और धीरे धीरे ३ बेटियो की शादी भी करवा दी ।   सरोज अब नौकरी से रिटायर हो गई  थी ।

उसकी अब एक ही इच्छा बाकी थी की किसी तरह से चौथी बेटी की शादी कर दूं मरने से पहले । लेकिन किस्मत को कुछ  और ही मंजूर था एक दिन सरोज के पेट में जोर से दर्द होने लगा आनन् फानन में अस्पताल में भर्ती किया ।

लेकिन हालत बिगड़ती जा रही थी सरोज की इच्छा थी की सारी जायदाद सुमित्रा के नाम कर दूं तो कम से कम  उसकी बेटी की शादी तो हो जाएगी ।  वसीयत की तैयारी होने लगी । कागजात तैयार हो गए लेकिन सिगनेचर  से पहले ही सुमित्रा की डेथ हो गयी ।

उसके मरने के बाद ३ से ४ लोगों ने प्रॉपर्टी पर अपना दावा किया हुआ है  अभी तक कोई फैसला  नहीं हुआ । सुमित्रा की लड़ाई मरने  के बाद भी चल रही है ।  आगे क्या होगा भगवान् जाने । 

Sunday, July 17, 2016

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Thursday, June 30, 2016

करे कौन भरे कौन

करे कौन भरे कौन

मेरे  गांव  के पास ही एक दूसरा गांव  था उसका नाम लालपुर था । लालपुर में एक लाला जिसका नाम था जीवन । जीवन  के २ बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की । दोनों की उम्र ६ और ९ साल की थी । एक दिन जीवन का बेटा  खेल रहा था और खेलते खेलते वो एक जीप में बैठ गया जो रुकी हुई थी । बेटे का नाम  ननकू था । ननकू  छुपम  छुपाई खेल रहा था इसलिए जीप में छुप गया था ।  लेकिन थोड़ी देर में ननकू को नींद लग गई और वो सो गया । जब उसकी आँख खुली तो जीप चल रही थी ।

इधर लालपुर मे जीवन अपने बेटे को ढूँढने लगा लेकिन काफी ढूंढने पे  भी ननकू कहीं नजर नही अाया तो समझ अाया की लगता है की ननकू खो  गया |
१ दिन  बीत गया पुलिस मे रिपोर्ट भी की लेकिन कुछ भी पता न चला |

ननकू के माता पिता परेशान हो गया |  उसी गाँव  मे एक बाबा रहता था उसका बड़ा नाम था | बाबा का नाम मिस्त्री बाबा था | लोगो ने जीवन को मिस्त्री बाबा के पास् जाने की सलाह दी | असल मे मिस्त्री बाबा ने जिनः सिद्धि की थी | उस जिन की मदद से सबका दुख दूर करते थे | जीवन मिस्त्री बाबा के पास गया औॉर अपना दुख बताया |

मिस्त्री बाबा बोले की मै बता तो सकता हूँ की तुम्हारा बेटा कहां है परंतु तुम्हे कल ५ किलो मिठाई देनी होगी |  जीवन  ने मिठाई देने का वादा किया फिर मिस्त्री बाबा ने बताया तुम्हारा बीटा नदी के उस पार्  गाँव   मे है | जीवन  उस पार के गाँव   मे गया सचमुच उसका बेटा वही था एक चाय  वाले की दुकान के पास् बैठा था |
जीवन के खुशी का ठिकाना न था बेटे को लेके घर अा गया | पूजा पाठ किया भगवान को मिठाई चढ़ाई लेकिन मिस्त्री बाबा ५ किलो मिठाई देना भूल गया |
उधर मिस्त्री बाबा उसका इंतजार करते रहे लेकिन १० दिन  बीत जाने के बाद भी मिठाई नही मिली तो मिस्त्री बाबा की मृतुय हो गई |
एक छोटी से भूल ने उनकी जान ले ली | इसलिए जीवन मे ऐसी भूल कभी न करें..