Sunday, April 6, 2014

T -20 world cup 2014 final Srilanka vs Bharat

टी २० वर्ल्ड कप २०१४  फाइनल (श्रीलंका ,भारत )

आज ६ अप्रैल २०१४ को टी २० वर्ल्ड कप २०१४ का फाइनल मैच हुआ जो कि भारतियों के लिए एक बुरा दिन साबित हुआ । श्रीलंका बड़ी आसानी से यह मैच जीत लिया । इस मैच को जीतने के लिए भारत को ५० रन कम पड़ गए । इस मैच को रहाणे और युवराज सिंह एक कमजोर कड़ी के रूप में साबित हुए । २२ गेंदो में सिर्फ ११ रन अगर २२ गेंदो पर २२ रन भी मारे होते तो कहानी कुछ और ही होती ।

उसके बाद जब रैना को आना चाहिए तो धोनी ने आकर ८ बाल ख़राब कर दी । कुल मिला के ऐसा लग रहा था जैसे मैच फिक्स हो इसलिए उनके बल्ले में जंक  लग गया ।

विराट कि कोसिस अच्छी थी पर ख़राब सपोर्ट के चलते सब पर पानी फिर गया ।

गेंदबाजों ने कुल मिला के अच्छा किया पर रन कम होने के कारण कुछ नहीं हो सका ।   कुल मिलकर यह मैच दर्द भरा रहा ।  फिर भी श्रीलंका कि टीम को टी २० वर्ल्ड कप २०१४  जीतने के लिए हार्दिक बधाई ।

Saturday, March 1, 2014

Das paise ka mela

दस पैसे

मेरे घर के पीछे एक गरीब परिवार रहता था ।  उसके मालिक का नाम बुधई था  जो कि अब इस दुनिया में नहीं है ।  बुधई के ३ बेटे और दो बेटी थी । एक बेटी का नाम अमृता था ।  हमारे गाव में हर साल एक मेला लगता था । उस बार भी मेला लगा । अमृता पैसे मांगने लगी पर बुधई के पास सिर्फ दस पैसे ही थे । बुधई ने अमृता को दस पैसे दे दिए ।

अमृता मेला घूमने लगी एक दुकान पे समोसा था उसने दस पैसे देकर  कहा समोसा दे दो दुकानदार ने कहा एक समोसा पचास पैसे का है ।  यह सुनकर अमृता  आगे बढ़ गई । दूसरी दुकान पर नमकीन माँगा तो दुकानदार ने बहुत थोडा सा नमकीन दिया अमृता बोली बस इतना सा।  अरे मेरा पैसा वापस कर दो इतना थोडा सा नहीं चाहिए ।

ऐसे ही थोड़ी देर चलता रहा अमृता  ने दस पैसे में पूरे मेले का मजा लिया फिर भी दस पैसा अभी ज्यों का त्यों ही था ।  एक गरीब इंसान दस पैसे के मूल्य को भी समझता है और कम से भी आनंद ले सकता है ।

ऐसे ही चलते चलते एक दुकानदार ने दस पैसे में नमकीन थोड़ी ज्यादा दे दी तो अमृता ने ले लिया और दस पैसे भी खर्च हो गए ।  आज भी वो पल मुझे याद आता है तो मुस्कराहट निकल जाती है क्यों कि पूरे मेले में मई उसके साथ था और मेरे पास भी पैसा नहीं था तो सोचा चलो दस पैसे का मजा भी देख लेंगे और मेला भी घूम लेंगे ।

मेरे गाव में मेला आज भी लगता है पर वो बात नहीं है आज महंगाई है ,पैसे देकर भी आनंद नहीं होता क्यों कि अब तो जहाँ जहाँ नजर जाती है रोज मेला ही देखने को मिलता है । जिंदगी एक भागदौड़ भरी और मेला आता है जाता है । 

Friday, February 28, 2014

How to calculate days in February month in the year

कोई भी साल का नंबर अगर ४ से पूरी तरह विभाजित है तो उस साल में फरवरी में २९ दिन होंगे नहीं तो २८ दिन ही होंगे।

जैसे कि २१०० को अगर ४ से विभाजित करेंगे तो जवाब आयेगा ५२५ तो २१०० साल के फरवरी में २९ दिन होंगे ।

Saturday, February 1, 2014

Gupchup ilaj

गुपचुप इलाज

मेरा एक दोस्त था उसका नाम डीपू था | पढ़ने लिखने मे बहुत ही तेज था | दसवी और बारहवी मे तो बहुत अच्छे नंबर से पास हुआ | अब स्नातक की डिग्री कर रहा था | एक दिन उसको हल्का बुखार हो गया मैने उससे कहा जाकर डॉक्टर को दिखा दो | पर वो नही गया और घर पर ही कोर्सीन लेकर खा लिया |


सुबह उसका बुखार ठीक हो गया | वो बोला देखा कुछ नही था एकदम चनगा हो गया हूँ | कुछ भी हो तो वो ऐसे ही दवाई खाकर ठीक हो जाता था |

ऐसे ही काफ़ी दिन तक चलता रहा | वो कमजोर होता जा रहा था | अभी वो होस्टल मे अकेले ही रहता था | एक दिन तो हद हो गई वो द्वा लेता तो बुखार उतर ही नही रहा था |

बुखार आता तो खुद द्वा ले लेता तो बुखार उतर जाता पर फिर हो जाता | ऐसे ही एक महीने तक चलता रहा | एक दिन वो बेहोश हो गया तो दोस्तो ने उसे हॉस्पिटल पहुचा दिया | पर उसकी हालत खराब होती जा रही थी | उसके मम्मी पापा भी आ गये | सभी परेसांन हो रहे थे की अचानक ए कैसे हो गया |


डीपू होश मे ही नही आ रहा था इसलिए कुछ पता ही नही चल पा रहा था | डीपू को एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल मे शिफ्ट किया जा रहा था पर कोई फ़ायदा नही हो रहा था |


फिर थोड़ी देर बाद डीपू होश मे आया तो पता चला उसने कुछ द्वा खा लिया तब से हालत खराब हो गई है लेकिन फिर डीपू बेहोश हो गया | आनन फानन मे उसे और बड़े हॉस्पिटल मे शिफ्ट किया गया पर डॉक्टर ने कहा की अब बहुत देर हो गई है |

डीपू की मौत हो गयी |

ये एक सत्य घटना है | मेरी लोगो से गुज़ारिश है की यदि आप ज़रा सा भी बीमार है तो कृपया अपना इलाज खुद ना करके तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे और अपनी जान बचाएँ |

Wednesday, January 1, 2014

Happy New Year 2014

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नया साल मुबारक हो २०१४

आप सभी दोस्तो को मेरी तरफ से नया साल मुबारक हो | मुझे याद है बचपन मे हम अपने हाथो से कार्ड बनाकर दोस्तो मे बाँटा करते थे | कोई कविता लिखकर देता था तो कोई गिफ्ट | उस समय का जुनून ही अलग था नया साल मनाने का |

आज भी लोगो मे जुनून होता है पर कोई पार्टी मे जाता है कोई कुछ और करता है |


खैर आप लोग जो भी करे दिल से करे मज़ा ज़रूर आएगा | जोश को कायम रखे और दिल को जवान | मेरी भगवान से प्रार्थना है की आप सभी के घरों मे रौनक आए | नये साल का हार्दिक अभिनंदन|

Wednesday, December 4, 2013

Thag of Delhi

दिल्ली का ठग

बहुत दिन पहले कि बात है मेरे एक मित्र दिल्ली में नौकरी करते थे । थोड़े दिन पैसे कमाने के बाद गाँव जाने कि तैयारी कर रहे थे उनका नाम हसमुख है । उनके पास  लगभग २० हजार रूपये थे । वो स्टेशन पर रेलगाड़ी का इंतजार कर रहे थे तभी एक आदमी उनके पास आया और बोला कहा जा रहे हो हसमुख भाई बोले कि बाराबंकी तो उस आदमी ने कहा कि वो भी बाराबंकी जा रहा है । जिस ट्रेन का इंतजार हसमुख भाई कर रहे थे उसी ट्रेन का इन्तजार वो आदमी भी कर रहा था । फिर बोला कि आजकल ठग बहुत लूट रहे है इसलिए मैंने अपने सारे रूपये का रसीद स्टेशन से कटवा लिया है बाराबंकी पहुंचूंगा तो रसीद दिखा कर पैसे वापस ले लूंगा ।
हसमुख थोड़े अनपढ़ थे सोचा अगर में भी रसीद कटवा लूँ तो रस्ते में जेब कतरी से बच जाऊंगा हसमुख ने कहा मेरे पास भी पैसे है मेरी भी रसीद बनवा दो ।
वो आदमी बोला मेरा बक्सा अपने पास रखकर रखवाली करो पैसे दो अभी बनवा देता हूँ ।
फिर पैसे लेकर वो रसीद बनवाने चला गया । बहुत देर हो गई वो आदमी नहीं आया अब हसमुख को समझते देर न लगी कि पैसे चले गए । उन्हें बहुत दुःख हुआ पर किसी तरह से गाव पहुच गए । उसका बक्सा खोल के देखा तो सड़े गले कपडे थे । ऐसे होते है दिल्ली के ठग ।

Saturday, November 23, 2013

Dost ki jubani

मेरा एक दोस्त था  वो पाच भाई थे  उस दोस्त का नाम जोगवीर था वो बहुत गुस्से वाला था ।  हर वक्त मुझसे झगड़ता रहता था एक बार मेरी उसकी बहस हो रही थी कि जब परिवार बड़ा हो जाता है तो झगड़े बढ़ते है और फिर बटवारा हो जाता है जमीन का और फिर मैने कहा तू तो पाच भाई है तुम्हारा तो बटवारा जल्द हो जायेगा ।

वो बोला नहीं हमारे भाइयों कि बीच कभी झगड़ा नहीं होगा ।  उस बात को २ ०  साल हो गए आज याद आया तो महसूस हुआ कि उसने उस दिन उसने प्रतिज्ञा करली थी कि भाइयों से कभी नहीं लड़ेगा ।  सच में आज भी सब मिलकर रहते है । सबकी अपनी अपनी दुकान और बिज़नस है ।

अगर मनुस्य ठान ले तो आज भी प्यार में ताकत वाली बात सिद्ध होती है  ।

Friday, October 4, 2013

Inderpoori Baba

इन्दरपूरी बाबा

बात थोड़ी पुरानी है । एक गाँव जिसका नाम भवानीपुर था । उस गाँव में एक बाबा रहते थे उनका नाम था इन्दरपूरी बाबा । इन्दरपूरी बाबा गाँव के मंदिर में एक छप्पर में रहते थे । में जब भी मंदिर जाता था इन्दरपूरी बाबा से जरूर मिलता था । एक बार में गया तो उन्होंने मुझे खाना भी खिलाया । खाना बहुत ही स्वादिस्ट था । बातों बातों में वो मुझसे तारीख पूछते थे यदि में गलत तारीख बता देता तो बोलते थे क्या पढ़ते लिखते हो तारिख भी नहीं मालूम है सही से ।
जो कोई भी मंदिर आता था कुछ न कुछ दान दक्षिना दे जाता था । कभी कभी हम उन्हें खाने पर भी बुलाते थे । उस मंदिर के पीछे एक नाऊ रहता था उसका नाम नन्हे था वो बहुत चालक किस्म का आदमी था वो भी कभी कभी बाबा से मिलने आता था ।

वो जब भी मिलते तो अपनी गाय के बारे में जरूर बताते थे की उनकी गाय बहुत सुन्दर थी एक बार वो रात को सो रहे थे तो कुछ लोग आये और उनके सीने के ऊपर बन्दूक तान दिया । लेकिन किसी तरह से बाबा भाग निकले लेकिन वे चोर बाबा की गाय चुरा ले गए । तब से बाबा को अपनी गाय बहुत याद आती है ।

वो कहते थे वैसी गाय उन्होंने कभी नहीं देखी ।

एक दिन बाबा अपने कपडे बाहर रखकर नहाने के लिए गए फिर जब लौट कर आये तो सर पकड़ कर बैठ गए उनके जेब से सारे पैसे गायब हो गए थे ।

इन्दरपूरी बाबा को बुखार सा हो गया उनको पता ही नहीं चला कि किसने पैसे चुरा लिया । पूछने पर बताया की पूरे ११ हजार रूपये चोरी हो गए ।

एक बाबा के पास ११ हजार रूपये मतलब की उसकी सारी जिंदगी की कमाई । किसी को पता नहीं चला की रूपये किसने चुराए पर मेरी सक की सुई उस नाऊ नन्हे पर ही गई । उसकी नजर में खोट था । चोरी के बाद नन्हे बाबा के साथ आता जाता था ताकि कोई सक न करे ।

बाबा को नन्हे पर पूरा भरोसा था उन्हें कभी नन्हे पर सक नहीं हुआ । थोड़े दिनों बाद बाबा पैसों के गम में बीमार रहने लगे और २ साल बाद उनका देहांत हो गया ।

उसके एक साल बाद नन्हे की दो भैंस मर गई । नन्हे को सजा तो मिल चुकी थे पर ये पता नहीं चला की चोरी किसने की ।

Tuesday, July 2, 2013

Champak singh ki kismat

चम्पक सिंह जो की मेरा एक दोस्त है उसके जिंदगी की दास्ताँ कुछ हटके है इस लिए मै चम्पक सिंह के बारे में विस्तार से लिखना चाहता हूँ । बातें बहुत सी है पर में उसके जीवन के नौकरी के पल और कुछ एजुकेशन के पल शेयर करूँगा ।

चम्पक सिंह के पापा का नाम जीवनलाल है ।

जीवनलाल - बेटा चम्पक अब तू स्नातक कर रहा है आगे का क्या बिचार है ।

चम्पक सिंह- पिताजी में सोच रहा हूँ कि कंप्यूटर कोर्स कर लेता हूँ ।

जीवनलाल - बेटा पहले बीएससी पूरा कर लो फिर देखो क्या करना । अब तक तो कभी फर्स्ट क्लास पास हुए नहीं तुम समझ में नहीं आता ये जिंदगी तुम्हे कहा लेकर जाएगी । तू पढता तो रात को २ बजे तक है फिर नंबर क्यों नहीं आते ।

चम्पक सिंह- क्या करूँ जो पढता हूँ वो आता नहीं और जो आता है वो पढ़ के नहीं जाता ।

जीवनलाल - हा हा हा तू नहीं सुधरेगा ।

चम्पक सिंह का एक दोस्त था उसको लोग प्यार से गड्डी के नाम से बुलाते थे । गड्डी और चम्पक सिंह एक ही कमरे में रहते थे । गड्डी को सब मालूम था की चम्पक सिंह के नंबर क्यों नहीं आते थे असल में रात को चम्पक सिंह कुछ अलग ही करता था या तो कहानी की किताब पढता था या फिर खुद कहानी लिखता था । दिन में जब अकेले होता था तो किस टीवी सीरियल का नाटक अकेले ही खेलता रहता था ।

अब तो बीएससी का आखिरी साल चल रहा था और बीएससी के बाद की सबको चिंता थी क्या करेगा आखिर चम्पक सिंह ।

जैसे तैसे चम्पक सिंह बीएससी हो गई और चम्पक सिंह गाँव चला गया । चम्पक सिंह का बड़ा भाई बैंगलोर में सरकारी नौकरी करता था एक दिन उसका ख़त आया की चम्पक सिंह को बंगलोर भेज दो आगे की पढाई मै देखूंगा चम्पक सिंह की ।

अगले दिन चम्पक सिंह का बैंगलोर का टिकेट कट गया और दो दिन के बाद चम्पक सिंह बंगलोर पहुँच गया । चम्पक सिंह सोचता था कि अब कुछ अच्छा हो जायेगा जिंदगी बन जाएगी ।

चम्पक सिंह के भाई का नाम नयन है ।

नयन - चम्पक सिंह अब आगे क्या करने का बिचार है ।

चम्पक सिंह - भाई आप जो ठीक समझे ।

नयन - मै सोच रहा हूँ की मास्टर इन कंप्यूटर का कोर्स कर लो लेकिन तुम्हारे नंबर बहुत कम है फिर भी कोसिस कर के देख लेते है सायद कही कुछ हो ही जाये ।

अगले दिन दो तीन कॉलेज से फॉर्म भर दिए पर कहीं कोई एडमिशन नहीं मिला । तो हारकर नयन ने एक PGDCA जो की एक डिप्लोमा कोर्स है एडमिशन दिल दिया ।

चम्पक सिंह ने टाइपिंग कोर्स भी कर लिया फिर PGDCA का कोर्स सुरु कर दिया । कुछ महीने के बाद हाफ इयर एग्जाम हुआ चम्पक सिंह सारे सब्जेक्ट में असफल हो गए ।

नयन ने सर पीट लिया क्या होगा आखिर चम्पक सिंह का ।

चम्पक सिंह ने भाई की इज्ज़त रखने के लिए पढाई सुरु की जैसे तैसे PGDCA पास कर लिया । फिर नयन ने चम्पक सिंह को कंप्यूटर का एक एडवांस कोर्स करा दिया जो की ६ महीने का था । उसमे चम्पक सिंह के ७ ० टका मार्क्स आये ।

चम्पक सिंह को लगा की अब जिंदगी की गाड़ी चल निकली ।

नयन ने कहा अब दो कोर्स हो गया नौकरी के लिए कोसिस करो । चम्पक सिंह ने इंटरव्यू देना सुरु किया । सॉफ्टवेर इंजिनियर के लिए अप्लाई करता था पर कहीं कोई नौकरी नहीं मिलती ।

एक दिन उसे डाटा एंटरी ऑपरेटर की नौकरी के लिए ऑफर मिला तो नयन को बताया । सैलरी बहुत कम है महज १ ५ ० ० रूपये प्रति माह ।

नयन ने कहा नौकरी सुरु कर दो अब भाग्य में जो लिखा है वही मिलेगा न ।

चम्पक सिंह ने नौकरी सुरु कर दी पर चम्पक सिंह का नौकरी में बिलकुल मन नहीं लगता था जैसे तैसे नौकरी कर लेता था । चम्पक सिंह का बॉस बड़ा ही कमीना था कुछ भी काम कराता था चपरासी के न होने पे चाय भी चम्पक सिंह को लानी पड़ती थे पर चम्पक सिंह ये सब नयन को नहीं बताता था ।

एक दिन तो हद ही हो गई बॉस ने ट्रक पर सामान लोड करने के लिए चम्पक सिंह को ही लगा दिया । चम्पक सिंह को गुस्सा तो बहुत आया पर मन मारके किसी तरह काम को निबटाया ।

एक दिन बॉस को शादी में जाना था तो चम्पक सिंह को घर की रखवाली करने के लिए घर के बाहर बैठा दिया । चम्पक सिंह खून के आंसू रोता था ।

अब बर्दास्त से बाहर हो रहा था ।

जैसे तैसे एक साल हो गया । एक दिन नयन ने कहा मेरे ऑफिस में नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर की नौकरी निकली है अप्लाई करदो सायद नंबर लग जाये ।

चम्पक सिंह ने तुरंत अप्लाई कर दिया और चम्पक सिंह को नौकरी भी मिल गई पुरानी नौकरी से हाय तौबा किया । नई नौकरी में भी दिक्कतें थी पर पुरानी नौकरी से ये नौकरी बेहतर थी । यहाँ भी कभी उनका रेलवे टिकेट कराओ कभी इनका ॥

नयन को पता था की गलत हो रहा है फिर भी कोई दूसरा चारा भी तो नहीं था । अब तो चम्पक सिंह MCA में एडमिशन भी ले लिया था जो की घर बैठे करना था । उसने IGNOU से एडमिशन लिया था ।



दिन बीतते गए जैसे तैसे ५ साल निकल गए और चम्पक सिंह का MCA पूरा हो गया । फिर चम्पक सिंह ने दूसरा इंटरव्यू दिया प्रोग्रामिंग का उसका उसमे भी सिलेक्शन हो गया और चम्पक सिंह ने वो नौकरी ज्वाइन कर ली ।

अब कुछ रहत की सांस थी । नई जगह पर एक साल नौकरी करने के बाद कुछ प्रमोशन न मिलने पर चम्पक सिंह ने नौकरी छोड़ दी ।

आज चम्पक सिंह फिर से बेरोजगार हो गया था । सारा कोर्स सर्टिफिकेट था पर नौकरी नहीं । चम्पक सिंह ने नयन को भी नहीं बताया की उसने नौकरी छोड़ दी । घर से टिफिन लेकर निकलता था कहता था नौकरी पे जा रहा हूँ और किस बस स्टॉप पर दिन भर बैठा रहता था ।

पूरा दिन उसे पहाड़ जैसा लगता था । अखबार साथ में ले जाता था अगर कहीं इंटरव्यू होता था तो अटेंड करता था । पैसे भी ख़तम हो रहे थे । टेंशन बढती जा रही थी । चम्पक सिंह सोचता था या दुआ करता था की भगवान् किसी को भी ऐसे दिन न दिखाए ।

एक दिन बस स्टॉप पर अपना मोबाइल से खेल रहा था चम्पक सिंह तभी फोन की घंटी घनघना उठी सामने जॉब ऑफर थी वो भी नौ हजार रूपये की । चम्पक सिंह ने नई नौकरी ज्वाइन कर ली फिर नयन को बताया जॉब बदल रहा हूँ ।

चम्पक सिंह के भाई को आज तक नहीं पता की नौकरी छोड़ दिया था चम्पक सिंह । नई नौकरी चम्पक सिंह को अच्छी लग रही थी एक साल तो बहुत ही अच्छा गया पर अगले साल बॉस से खटपट सुरु हो गई सबको इन्क्रीमेंट मिलता था परन्तु चम्पक सिंह को नही । अब ये नौकरी भी चम्पक सिंह को भारी पड़ने लगी । सबके सामने चम्पक सिंह अपने को ठगा सा महसूस करता था ।

चम्पक सिंह को लगा वो जिंदगी से हार गया परन्तु चम्पक सिंह ने हिम्मत नहीं छोड़ी नई नौकरी के लिए अप्लाई करता रहा । एक दिन उसकी मुराद पूरी हो गई एक बड़ी कंपनी में जॉब ऑफर हो गई ।

आज की डेट में चम्पक सिंह के पास अच्छी नौकरी है बीबी है घर है पर फिर भी पता नहीं क्यों चम्पक सिंह बुझा बुझा सा रहता है । मै भगवान् से दुआ करता हूँ की आप चम्पक सिंह जैसी परिस्थिति से न गुजरे ।

Friday, June 28, 2013

Beware from Fraud of Modeling and acting for Bollywood

अगर आप मॉडलिंग में या फिर एक्टींग में जाना चाहते है या फिर ये आपका सपना है कि आपका बेटा या बेटी एक्टिंग में काम करें तो जल्दी बाजी में कोई गलत कदम न उठायें । ऐसी वैसी जगह अपना मेहनत का कमाया हुआ पैसा न गवाएं । आजकल एक्टिंग के नाम पर बाजार में बहुत से लुटेरे बैठे हुए है ।

अगर नजर डालेंगे तो ये किसी मॉल जैसे र सिटी मॉल या फिर कोई और मॉल में आप से फॉर्म भरवाएंगे स्टूडियो बुलाएँगे और फोटो खीचने के नाम पर दस से पच्चीश हजार रूपये ले लेते है । फिर एक फोटो अल्बम दे देंगे और कहेंगे कि ऑडिशन के लिए कॉल करेंगे पर कॉल कभी आता नहीं आपका कॉल कोई उठाता नहीं और आपका पैसा गया ।

ऐसे ही अगर उन्हें १ सप्ताह में पच्चीश ग्राहक मिलते है तो उनकी हो गई अच्छी खाशी कमाई और आपकी बर्बादी ।

मै किसी किसी स्टूडियो का नाम तो नहीं ले सकता पर आप जैसे समझदार के लिए मेरा ये इशारा ही काफी है और जब भी आपको कोई ठग मिलेगा तो आप फसेंगे नहीं ।

अगर आप फसेंगे तो बहुत पछतायेंगे । अगर आप अपने सपने को पूरा करना चाहते है तो सही रास्ता चुने । किसी अच्छे इंस्टिट्यूट में ट्रेनिंग ले या फिर अपने बच्चे को ट्रेनिंग दिलवाएं अगर आपमें हुनर है तो उसी ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट से आपके सपने की सुरवात हो जाएगी ।

एक बार अगर आपका चांस लग गया तो मेरा यकीन करें फिर आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता । तो फिर सोच क्या रहे है निर्णय लेने का सही वक्त आ गया ।

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