Thursday, November 23, 2017

Government job, Bribe and Why

सरकारी नौकरी की तलाश बहुत लोगों को होती है. सरकारी नौकरी बहुत ही मुश्किल से मिलती है. अगर किसी को आसानी से मिल जाए तो बहुत ही अच्छा नहीं तो बिना घूस दिए सरकारी नौकरी नहीं मिलती मैं अपने दोस्त के बारे में बताना चाहता हूं सन 1990 में उन्होंने फार्मासिस्ट का कोर्स किया फार्मेसी का कोर्स पूरा करने के बाद जगह जगह पर नौकरी के लिए अप्लाई किया  कई जगह  तो घूस की बात भी की  लेकिन हर जगह काम बनते बनते रह गया उनकी उम्र 32 थी और अगर जल्दी ही सरकारी नौकरी नहीं मिलती तो सरकारी नौकरी के मिनिमम उम्र भी खत्म हो जाती है उन्होंने हार कर डॉक्टर की प्रैक्टिस शुरू कर दी किस्मत ने साथ दिया  कॉन्ट्रैक्ट बेस पर शिक्षामित्र की भी नौकरी मिल गई जो कि केवल ₹ 3500 पर महीना मिलता था फिर भी वह सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई करते रहे और धीरे-धीरे उनकी उम्र 42  हो गई फार्मेसी में अचानक उनका नंबर आ गया सरकारी नौकरी के लिए अब जब उनका नंबर आ गया तो उनकी उम्र उस में बाधा हो गई लेकिन उन्होंने अप्लाई 32 वर्ष की उम्र में ही किया था तो उनका चांस बनता था उन्होंने मुकदमा किया 1 साल तक मुकदमा  लड़ा बहुत सारा पैसा वकील को खिलाया कुछ पैसा ग्रुप में खिलाया सरकारी लोगों को तब जाकर उनका एप्लीकेशन पास हुआ और उन्हें फार्मेसी की नौकरी मिल गई मतलब आप सोच सकते हैं एक नौकरी पाने के लिए उनको 32 साल से 40 साल तक पढ़ाई करनी पड़ी .

ऐसे ही ना जाने कितने लोगों को संघर्ष करना पड़ता है मैं कहता हूं कि सरकारी नौकरी का महत्व ही क्या रह गया सरकार लोगों को नौकरी देती है काम करने की लेकिन काम तो कोई करता ही नहीं है सब लोग एक ही काम करते हैं बस  घूस लेने का काम करते हैं.मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जितने भी लोग आज सरकारी नौकरी कर रहे हैं कम से कम 70% लोग घूस देकर नौकरी ज्वाइन किया है बाकी को 30% लोगों को भी उनके काबिलियत के दम पर नौकरी मिलती है. के 30 परसेंट वही लोग हैं जिसके दम पर आज देश टिका हुआ है.घूस लेने वाले कई तरीके के होते हैं एक तो वह होते हैं जो डायरेक्ट बोल देते हैं कि भैया कुछ चाय पानी तो वह लोग बहुत अच्छे होते हैं जो डायरेक्ट बोल देते हैं कम से कम हमारा समय बच जाता है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो आपका एक बार में काम करते ही नहीं वह बोलेंगे कल आओ कल गए तो परसों सो गए तो कहेंगे 3 दिन बाद आओ इस तरीके से कम से कम 10 12 दिन निकाल देंगेफिर जवाब थक जाओगे फिर जब आप थक जाओगे तब खुद ही बोल दोगे कि भैया जो चाय पानी लेना हो ले लो लेकिन मेरा काम खत्म आपको मजबूर कर देंगे कि आप सामने से पैसा निकाल कर दे तो आपके पास कोई चारा ही नहीं रहेगा यह मेरा खुद का पर्सनल एक्सपीरियंस है मुझे एक बार डेट ऑफ बर्थ में एक करेक्शन कराना था मैं बीएमसी ऑफिस गया वहां पर मैंन अधिकारी के पास गया पहली बार देखा बोला अपना पासपोर्ट लेकर आओ अपनी पत्नी का पास बुक लेकर आओ आधार कार्ड लेकर आओ अपनी पत्नी का आधार कार्ड लेकर आओ


मेरे पास एक समस्या आ गई मेरा तो बैंक अकाउंट था लेकिन मेरी पत्नी का बैंक अकाउंट नहीं फिर मैं बैंक गया पत्नी का बैंक अकाउंट बनाने के लिए जो जो जो डॉक्यूमेंट बैंक ने मांगा वह भी मेरे पास नहीं था तब बैंक वाले ने सुझाव दिया और अपनी पत्नी का जॉइंट अकाउंट खुलवा लो तो मेरा डॉक्यूमेंट चल जाएगा बैंक के दो-तीन चक्कर लगाने के बाद पत्नी का और मेरा जॉइंट अकाउंट खुल गया सारे डॉक्यूमेंट मैंने इकट्ठा किए और बीएमसी ऑफिस गयाउसने देखा और फिर बोला आज तो बड़े साहब नहीं हैं सिग्नेचर नहीं हो पाएगा आप दो दिन बाद आइएगा ठीक है मैं वापस आ गया मैं दो दिन बाद गया.मैंने फिर उसको बोला भाई आज तो काम कर दो वह सोचने लगा कि मैं चार-पांच चक्कर मार चुका हूं फिर भी कुछ पैसे के बारे में बात नहीं कर रहा हूं तो बोला देखो बहुत दिक्कत है पुराना डॉक्यूमेंट से निकालकर चेक करना पड़ेगा क्या दिक्कत है क्यों आपकी उसमें गलती हुई है तब जाकर काम होगा.बोला आप कल आ जाओ कल मैं बताता हूं ऐसे कल कल करते हैं 2 हफ्ते निकाल दिया उसने मेरे कभी बोलता कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं है करेक्शन करने वाला नहीं है कई बोलता फाइल नहीं मिल रही है कई बोलता बड़े साहब नहीं हैं कभी कुछ ना कुछ बोल कर टाल देता जब लास्ट में बोला कि मैं कुछ नहीं बोल रहा हूं कंप्यूटर ऑपरेटर जो है चाय पानी मांग रहा था तो मैंने बोला यार पहले बोल देते तो इतनी चक्कर नहीं पढ़ते.मैंने बोला ठीक है ले लो कोने में ले गया बोला ₹500 तो ₹500 दिए तब बोला कि आप कल आ जाइए और अपना बर्थ सर्टिफिकेट  लेकर जाइए. देखिए तो पैसा देने के बाद भी उस दिन नहीं मिला मुझे दो दिन बाद तो चक्कर लगाने के बाद बर्थ सर्टिफिकेट मुझे मिला एक छोटा सा करेक्शन और इतना बड़ा सजा आप सोच सकते हैं क्या है सरकारी नौकरी का मतलब क्या इसीलिए सरकार नौकरी देती है जिसको जनता की सेवा के लिए रखते हैं वह जनता से ही सेवा की उम्मीद करता है सरकारी नौकरी भाषा परिभाषा बिल्कुल बदल चुकी है सेवा करते नहीं हैं सेवा करवाते हैं.

सरकारी नौकरी वाले लोग शराब मांस मछली के आदी हो चुके होते हैं वह अपनी जरूरत पूरा करने के लिए उसके पैसे का इस्तेमाल करते हैं अपनी मेहनत का पैसा उसमें इस्तेमाल नहीं करते.सरकारी नौकरी का दुरुपयोग हर जगह सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होती बच्चों को ट्यूशन पढ़ना पड़ता है ट्यूशन के लिए मोटे मोटे पैसे देने पड़ते हैं तब मास्टर ठीक से पढ़ाते हैं स्कूल कोई बच्चा आता है या नहीं आता है उस से मतलब नहीं ट्यूशन आना चाहिए पैसा देना चाहिए. पुलिस स्टेशन में भी अगर आपको एक करैक्टर सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन चाहिए तो भी आप को कम से कम 300 से ₹1000 भरने पड़ते हैं. अगर आपने पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया है तो अब तक अगर आप टोटल निकाले तो कम से कम 80 परसेंट लोगों ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए चाय पानी पुलिस वालों को दिया होगा अगर किसी ने पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए पैसा नहीं दिया है तो इस पोस्ट की कमेंट में लिखें और जिसने दिया है वह भी लिखें परसेंटेज अपने आप निकल पाएगा.


लेकिन हां जहां पर कॉन्ट्रैक्ट बेस नौकरी प्राइवेट नौकरी है वहां पर थोड़ा अच्छा काम होता है क्योंकि उनको सिर्फ तनख्वाह मिलती है बाकी ग्रुप मिलने की गुंजाइश बहुत कम रहती है क्योंकि उनके   बॉस की नजर हमेशा उन पर रहती है बराबर से उनको अपने काम का रिपोर्ट बनाना पड़ता है वह अपनी जिम्मेदारियों से बने रहते हैं तो अच्छा काम सब प्राइवेट में हो रहा है तो इन सरकारी नौकरियों का क्या मतलब क्या सरकार को नहीं चाहिए अच्छा काम हो अगर यही   घुस सिस्टम चलना है तो क्या इसको खत्म नहीं करना चाहिए खत नहीं कर सकती तो क्या सुधार नहीं करना चाहिए सरकारी का सुधार इसलिए भी नहीं हो रहा है क्योंकि उनको सुधार करने वाले भी सरकारी हैं.

आम आदमी आम आदमी होता है वह सब पचड़ों में नहीं पड़ना चाहता पाक इसलिए वह  घूस देकर निकल जाना समझता है क्योंकि खर्चा तो दोनों तरफ से ही होना है लड़ोगे तो भी खर्चा होगा लड़ने का खर्चा घुस दोगे तो शायद ही खर्चा होगा कि कुछ देना भी जुर्म है अगर हम अपनी आवाज़ उठाएं तो सुधार हो सकता है लेकिन आवाज एकता के साथ होना चाहिए उसके लिए भी सिस्टम होना चाहिए वह सिस्टम नहीं है इसलिए एक आदमी की आवाज कमजोर हो जाती है जनता का भरोसा ही उठ गया जिसके पास पैसा है सरकारी स्कूल में बच्चे को नहीं भेजता है सरकारी हॉस्पिटल में इलाज नहीं करवाता है पुलिस रिपोर्ट होने से डरता है रिपोर्ट लिखवाने से भी डरता है आप कोई भी डिपार्टमेंट ले लीजिए सरकारी का चाहे वह बीएमसी ऑफिस चाहे वह बैंक का ऑफिस चाहे पासपोर्ट ऑफिस हो चाहे  पुलिस थाना होबिजली का विभाग हो होम डिपार्टमेंट को कोई भी बिना घूस के तो काम चलता ही नहीं.

एक आदमी सब कुछ नहीं कर सकता जैसे कि नरेंद्र मोदी जी आज प्रधानमंत्री लेकिन वह हर डिपार्टमेंट पर नहीं पहुंच सकते जनता की भी जिम्मेदारी है की हर शिकायत को प्रधानमंत्री तक पहुंचा है हर विचार को प्रधानमंत्री तक पहुंचा जो विचार देश हित में ना हो और सब विचारपूर्वक इतना हल्ला करें प्रधानमंत्री भी मजबूर हो जाए सिस्टम को सुधारने के लिए.

जय हिंद जय हिंद जय हिंद.

Sunday, November 19, 2017

A little story Managing Work on time

मैं एक छोटी सी कहानी के बारे में बताना चाहता हूं. जो कि मेरे बाबा के ऊपर हैं मेरे बाबा बहुत ही अकेले थे खेती करते थे घर का सारा काम करते थे एक मजदूर भी उनके साथ काम करता था 1 दिन की बात है खेत में जाना था बैलगाड़ी पर गन्ने को डालना था जो कि वह उनके अकेले की बस की बात नहीं थी.

खेत पर गए वह बैलगाड़ी आई गन्ने को पहले काटना होता है उसके बाद उसका गट्ठर बनाना होता है और उसके बाद उसको बैलगाड़ी पर चढ़ाना होता है जो कि एक आदमी के बस की बात नहीं थी लेकिन उस जमाने में भी काम को निकलवाना उसका एक तरीका होता था |

उसके बारे में सोचना पड़ता था कि कैसे किसी की मदद ली जाए ऐसे अगर किसी से कहो कि थोड़ा सा काम कर दो तो कोई सुनता नहीं था एक उनके फ्रेंड थे जो कि उनके साथ कभी कभी घूमा करते थे लेकिन उनसे कुछ काम कहो तो वह करते नहीं थे वह वहां से गुजरे तो बाबा ने सोचा क्यों ना कोई तरकीब लगाई जाए और उनकी सहायता ली जाए उनके दोस्त का नाम तख्ती लाल था बाबा  बोले कहां जा रहे हो |तख्ती लाल बोले  ससुराल जा रहा हूं यहां आओ आपसे बात करना है कितना खेती है तुम्हारे पास |तख्ती लाल बोले 4भीगा है अच्छी बात है खेती कैसी चल रही है ठीक ठाक चल रहा है एक काम करो मेरे पास 12भीगा  है उसमें से दो बीघा तुम अनाज बो लो उसका  पहले उसकी बोआई करो जुताई करो फिर फसल काट लो इतना सुनते ही तख्ती लाल काम में हाथ बताने लगे और सारे के सारे गट्ठर बैलगाड़ी पर लाद दिया बाबा का काम हो गया था |

 बाबा बोले उनसे तुमने तुमने खेत में कुछ बीज बोया है  तख्ती लाल बोले बाबा काम नहीं कर मिल रहा है ज्यादा | तो बाबा बोले अरे भाई जब तुम अपनी खेत ही नहीं कर पा रहे हो तो हमारी खेती क्या करोगे अब तख्ती लाल को समझ में आया कि बाबा ने अपना काम निकाल लिया है पहले बाबा बोले पहले अपनी खेती करके दिखाओ फिर मेरी खेती करना तो यह था काम करने का एक तरीका |

किसी से काम निकालने का भी तरीका आना चाहिए केवल काम करने ही बहादुरी नहीं होती है उसकी व्यवस्था करना भी एक बहादुरी का काम है जो हमारे बाबा बखूबी निभाया करते हैं||

उनकी ऐसी छोटी-छोटी बहुत सारी कहानियां है मैं आपके साथ साझा करता रहूंगा और उम्मीद करता हूं आपको भी कुछ ना कुछ इन कहानियों से सीखने को मिलेगा कुछ अच्छा रहेगा तो कुछ खराब रहेगा लेकिन कुछ ना कुछ आपको जरूर सीखने को मिलेगा |

Sunday, July 23, 2017

Corruption cleanup is required

 भ्रस्टाचार का भी सफाई अभियान होना चाहिए

आज की डेट में भ्रस्टाचार कहा कहा है या कहे कहा नहीं है | सबसे ज्यादा भ्रस्टाचार  तो नेताओं में है उसके बाद सरकारी कर्मचारी जो हर एक सेवा में रिश्वत लेते है | अगर आप  मजबूर है तो आपका लुटना  तय है | मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी यूँ  ही नहीं पड़ा मजबूर है तो काम निकलना तो अहिंशा को अपनाते हुए चुपचाप रिश्वत दे और अपना  कराएं ये ही दुनिया की रीति बन रही है |

मोदी जी अकेले भ्रस्टाचार से लड़ रहे है कुछ लोग कंधे से कन्धा  मिला के चल रहे है हमारा भी फ़र्ज़ बनता है की जहा कमजोर कड़ी मिले हम मोदी जी तक पहुचाये और देश की सेवा में योगदान दें |

नगर निगम में भ्रस्टाचार अगर कोई एक भी करेक्शन करना है जन्म सर्टिफिकेट में तो कम से  कम  १० चक्कर लगवाते है फिर इंसान हार के रिश्वत देता है तब काम होता है | रिश्वत लेने वालों की ये ख़ास पहचान है आपका का काम एक बार में हो जाए ऐसा सपने में भी मत सोचना |

कोई सिग्नेचर चाहिए तो चपरासी रिश्वत लेता है | पुलिस वारीफिकेशन सर्टिफिकेट चाहिए तो  पैसे दो वारीफिकेशन नहीं होगा और सर्टिफिकेट मिल जायेगा | RTO  से  लाइसेंस चाहिए तो पैसे दो बिना टेस्ट के ही मिल जायेगा |

रिश्वत  ने कही काम आसान बना दिया   तो कही मुश्किल | जो   रिश्वत  नहीं  देते उन्हें तो लम्बा चलना पड़ता है | सरकारी नौकरी अगर  किसी को मिलती है तो वो सैलरी से पहले रिश्वत के बारे में सोचता है क्यों की उसे नौकरी रिश्वत से ही तो मिलती   है |

मोदी जी ने सफाई अभियान चलाया लेकिन उससे जमीन तो साफ़ हो जाएगी लेकिन भ्रस्टाचार की गन्दगी नहीं | भ्रस्टाचार  की गन्दगी अकेले मोदी जी नहीं दूर कर सकते हर ईमानदार को आगे आना होगा अपनी आवाज बुलंद करनी होंगी। कुर्बानियां भी देनी होंगी |

भ्रस्टाचार करने वाले बहुत पॉवरफुल हो जाते है इससे पहले ये आतंक में तब्दील हो हमें बदलना होगा तभी देश बदलेगा |  भ्रस्टाचार का भी सफाई अभियान होना चाहिए  तभी सभी को इन्साफ मिलेगा |

अगर  भ्रस्टाचार का भी सफाई अभियान हो तो  बेरोजगारी से मुक्ति  मिलेगी | कोई भूखा नहीं सोयेगा सभी को शिक्षा मिलेगी | हर जगह बिजली और पानी मिलेगा , क्राइम पर भी लगाम लगेगी , पढ़े लिखे लोग बढ़ेंगे  |

Sunday, June 4, 2017

Clips During Village visit on Mundan ceremony of my Son to Remember

ये कुछ क्लिप है  जो मेरे पुत्र  मुंडन के समय ली गई है |  बैसाख पूजा की भी एक क्लिप है |

                                                           मरी माता मंदिर


कोड़ा फन 


डांस  


बैसाख पूजा

गुब्बारा फन



Saturday, May 13, 2017

Effects of Machines

मशीनीकरण का प्रभाव

मशीनीकरण  एक ऐसा नाम है जिसने बहुत सारे काम आसान कर दिया | सब मशीनो  के बारे में लिखना तो संभव ही नहीं है लेकिन कुछ मशीनों के बारे में विचार जरूर किया जा सकता है |

मेरे गांव की ही बात करता हूँ जब मै छोटा था तब खेतो में मजदूरों के लिए खाना ले जाया करता था मजदूर भैंसो की मदद से खेतों की जुताई किया करते थे पुरे दिन जुताई होती थी तब जाके कहीं १ या २ बीघा जुताई हो पाती थी |

वही  काम आज ट्रेक्टर ने ले लिया है दिन का काम कुछ मिनटों का हो गया | समय का फायदा हमें तो हुआ पर घाटा किसे हुआ उन भैंसो का |  उनका तो काम ही ख़त्म हो गया जब काम ख़त्म हो गया तो उनका इस दुनिया में क्या काम है |

लेकिन एक काम तो मिल गया इन भैंसो को कैसे कम  किया जाये | भैंसो को कम  करने का एक ही रास्ता था इनका मांस एक्सपोर्ट कर दो दूसरे देशों में लेकिन प्रश्न ये था की इतनी जल्दी इन्हे काटा कैसे जाये | यह भी काम मनुष्यों ने आसान कर दिया एक और मशीनीकरण |

फैक्ट्री खोल दो एक दिन में हजारों भैंसे निकल जायेंगे | भैंस तो केवल एक उदाहरण है ऐसे ही न जाने कितने सारे जानवर इन मशीनों की चपेट में आ रहे है |

सुबह सुबह जब हम सो कर उठते है तो गुड मॉर्निंग बोलते है कितनी हसीन  लगती है ये सुबह लेकिन अगर थोड़ा सोचे तो इसी सुबह में बहुत सारे जानवर सुला दिए जाते है |  हम मंदिर जाते है गाय को चारा दान करते है लेकिन जरुरी नहीं अगले दिन वो गाय  चारा खाने के लिए फिर से मिले |

एक तरफ शृद्धा सुमन दूसरी तरफ इतनी ज्यादा हैवानियत समझ नहीं आता की कैसी है ये दुनिया | हम खुद को जिन्दा रखने के लिए काम तलाश कर लेते है लेकिन जानवरो को काम से बेदखल कर उन्हें मौत के मुँह में झोंक देते है |

मशीनीकरण जितना बढ़ता जायेगा जानवर तो क्या धीरे धीरे इंसान का भी महत्त्व ख़त्म हो जायेगा तो क्या इंसानो की भी बोली लगनी शुरू  हो जाएगी |

इंसान जब नसेड़ी हो जाता है तो छोटे से बड़े नशे की ओर  बढ़ता है धीरे धीरे नशे में अपना जीवन ख़त्म कर लेता है इसी तरह मांसाहार एक नशा है जो स्टार्ट तो अंडे से होता है लेकिन ख़त्म होने की कोई सीमा नहीं है चिकेन ,मटन ,बीफ और कुछ हद तक खुद इंसान ही इंसान को खाने लगेगा |

वही शायद इस कलयुग का अंत होगा | कहीं कहीं  सरकार  ने गाय खाने में रोक लगा दी है अगर सरकार ने रोक लगाई है तो कहीं न कहीं सोचा होगा की गाय काटना गलत है तभी तो रोक लगाई है |  मांसाहार अच्छा है या बुरा अगर आप थोड़ा सा दिल से सोचेंगे तो जबाब तुरंत मिल जायेगा की किसी भी तरह की हत्या में सहभागी होना गलत है | जब गाय की हत्या करना गलत है तो बाकी जानवर कागज के तो बने नहीं है दर्द सबको होता है सभी जानवरों को काटने पर रोक लगनी चाहिए |

जो इंसान सेल्फिश नहीं होता वो ही मांसाहार को गलत मानेगा बाकी सही मानेंगे | मेरा एक दोस्त था उसने एक बार भैंस काटते हुए देख लिए तो उसे १० दिन तक बुखार ही आता रहा आखिर ऐसा क्यों हुआ क्यों की उसके मन और दिल ने आक्सेप्ट नहीं किया कि  यह सही है |

जो कटाई कल हाथों से काम मात्रा में होती थी आज वही मशीनों से बड़ी मात्रा में होती है | मशीनो  का काम जब अनाज पाने तक सीमित रहता है तब तक सही रहता है लेकिन मशीनों का दुरूपयोग हमें पाप का भागिदार बनता है |

यही मशीनीकरण का प्रभाव है | 

Tuesday, April 11, 2017

Expertise required for life

विशेषता जरुरी है

इस दुनिया में आप कुछ भी करो लेकिन अगर आपको आगे जाना है तो अप्पको एक्सपर्ट होना पड़ेगा | आप सीखते तो बहुत कुछ है लेकिन एक्सपर्ट सब चीजों में नहीं होते है |

आपके अच्छे भविष्य के लिए विशेषता जरुरी है | मैंने अपने कैरियर में बहुत उतार चढाव देखे है पहले एडमिन वर्क में था फिर प्रोग्रामिंग में आया लेकिन पैसे बहुत कम  मिलते थे कारण  यही था की किसी एक चीज में एक्सपर्ट नहीं था मै |

फिर मैंने एक प्रोग्रामिंग भाषा का चयन किया ४ साल काम करने के बाद धीरे धीरे एक्सपर्ट हो गया | अब थोड़ा सेट हो गया हूँ |

इसलिए मेरी यही एडवाइस है जो भी करो एक्सपरटाइज हाशिल करो तो कुछ मिल सकेगा जीवन में |

मैं  सारे क्लास में सेकंड क्लास पास हुआ फिर भी सफल हूँ क्यों की मैंने एक्सपेर्टीसे हाशिल की अपने विषय में आप भी आगे आ सकते है एक्सपर्ट होना जरुरी है |

आज कम्पटीशन का जमाना है तो चयन भी सही होना चाहिए | पहले अपने इंटरेस्ट को जानो फिर विषय  का चयन करो तो जीवन में कभी पीछे नहीं रहोगे |

आज का सांता ज्ञान यही है की विशेषता जरुरी है | 

Sunday, March 12, 2017

Happy Holi festival 2017 Wishes In India



आप सभी दोस्तों को होली  हार्दिक सुभकामनाये

आप सभी को और आपके परिवार की ओर से रंगो का पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आप व आपका परिवार हमेशा हसते मुस्कुराते रहें व हम सभी मिलकर इस पर्व को मनाएँ ।

चुनाव जीतने के लिए  देशवाशियो और भारतीय जनता पार्टी को जीत की बधाई और होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

होली की हर्षित बेला पर, खुशियां मिले अपार।
यश,कीर्ति, सम्मान मिले, और बढे सत्कार।।
शुभ रहे हर दिन हर पल, शुभ रहे विचार।
उत्साह बढे चित चेतन में, निर्मल रहे आचार।।
सफलतायें नित नयी मिले, बधाई बारम्बार।
मंगलमय हो काज आपके, सुखी रहे परिवार।।
आप और आपके परिवार को "होली की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं".

Yug

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Sunday, December 25, 2016

Anand Mela clips at Mumbai

आनंद मेला का औयोजन हर साल  दिसम्बर के महीने में होता  है । में इस वीडियोस के जरिये कुछ झलक पेश करता हूँ । बच्चे खूब मजे करते है । यह क्लिप २०१६ साल की है




















Sunday, September 25, 2016

सरोज एक संघर्ष

सरोज

सरोज एक संघर्ष का  नाम था ? सरोज एक लड़की थी जिसकी शादी के १ साल ही हुए थे और उसके पति की डेथ हो गई थी । सरोज अब टूट सी गई थी । अडोस पड़ोस  के लोगों  ने समझाया जिंदगी जीने  के लिए है उसे जाया मत करो ।

सरोज १० वी  पास थी तो उसने अपनी पढाई फिर से शुरू की किसी तरह से १२ वी  की परीक्षा पास की फिर टीचींग  का कोर्स कर लिया और एक दिन अध्यापिका बन गई  ।

जिंदगी अब कुछ अच्छी  लगने लगी । घर में कोई जेंट्स नहीं था और सभी बहनो की शादी  थी । खेती भी थी । सरोज की एक बहन की ४ बेटी थी । सरोज की बहन का नाम सुमित्रा था ।

सुमित्रा का पति जुवारी था एक दिन वो सब कुछ जुए  में हार गया । तो सुमित्रा भी सरोज के साथ रहने लगी एक दिन सुमित्रा के पति की भी डेथ  हो गई  क्योंकि उसे कैंसर हो गया था ।

अब सरोज ने सुमित्रा और उसकी बेटियों की जिम्मेदारी अपने सर  ले लिया । सबको पढ़ाया लिखाया और धीरे धीरे ३ बेटियो की शादी भी करवा दी ।   सरोज अब नौकरी से रिटायर हो गई  थी ।

उसकी अब एक ही इच्छा बाकी थी की किसी तरह से चौथी बेटी की शादी कर दूं मरने से पहले । लेकिन किस्मत को कुछ  और ही मंजूर था एक दिन सरोज के पेट में जोर से दर्द होने लगा आनन् फानन में अस्पताल में भर्ती किया ।

लेकिन हालत बिगड़ती जा रही थी सरोज की इच्छा थी की सारी जायदाद सुमित्रा के नाम कर दूं तो कम से कम  उसकी बेटी की शादी तो हो जाएगी ।  वसीयत की तैयारी होने लगी । कागजात तैयार हो गए लेकिन सिगनेचर  से पहले ही सुमित्रा की डेथ हो गयी ।

उसके मरने के बाद ३ से ४ लोगों ने प्रॉपर्टी पर अपना दावा किया हुआ है  अभी तक कोई फैसला  नहीं हुआ । सुमित्रा की लड़ाई मरने  के बाद भी चल रही है ।  आगे क्या होगा भगवान् जाने । 

Sunday, July 17, 2016

आर्टिकल लिख के पैसा कमाएं

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Thursday, June 30, 2016

करे कौन भरे कौन

करे कौन भरे कौन

मेरे  गांव  के पास ही एक दूसरा गांव  था उसका नाम लालपुर था । लालपुर में एक लाला जिसका नाम था जीवन । जीवन  के २ बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की । दोनों की उम्र ६ और ९ साल की थी । एक दिन जीवन का बेटा  खेल रहा था और खेलते खेलते वो एक जीप में बैठ गया जो रुकी हुई थी । बेटे का नाम  ननकू था । ननकू  छुपम  छुपाई खेल रहा था इसलिए जीप में छुप गया था ।  लेकिन थोड़ी देर में ननकू को नींद लग गई और वो सो गया । जब उसकी आँख खुली तो जीप चल रही थी ।

इधर लालपुर मे जीवन अपने बेटे को ढूँढने लगा लेकिन काफी ढूंढने पे  भी ननकू कहीं नजर नही अाया तो समझ अाया की लगता है की ननकू खो  गया |
१ दिन  बीत गया पुलिस मे रिपोर्ट भी की लेकिन कुछ भी पता न चला |

ननकू के माता पिता परेशान हो गया |  उसी गाँव  मे एक बाबा रहता था उसका बड़ा नाम था | बाबा का नाम मिस्त्री बाबा था | लोगो ने जीवन को मिस्त्री बाबा के पास् जाने की सलाह दी | असल मे मिस्त्री बाबा ने जिनः सिद्धि की थी | उस जिन की मदद से सबका दुख दूर करते थे | जीवन मिस्त्री बाबा के पास गया औॉर अपना दुख बताया |

मिस्त्री बाबा बोले की मै बता तो सकता हूँ की तुम्हारा बेटा कहां है परंतु तुम्हे कल ५ किलो मिठाई देनी होगी |  जीवन  ने मिठाई देने का वादा किया फिर मिस्त्री बाबा ने बताया तुम्हारा बीटा नदी के उस पार्  गाँव   मे है | जीवन  उस पार के गाँव   मे गया सचमुच उसका बेटा वही था एक चाय  वाले की दुकान के पास् बैठा था |
जीवन के खुशी का ठिकाना न था बेटे को लेके घर अा गया | पूजा पाठ किया भगवान को मिठाई चढ़ाई लेकिन मिस्त्री बाबा ५ किलो मिठाई देना भूल गया |
उधर मिस्त्री बाबा उसका इंतजार करते रहे लेकिन १० दिन  बीत जाने के बाद भी मिठाई नही मिली तो मिस्त्री बाबा की मृतुय हो गई |
एक छोटी से भूल ने उनकी जान ले ली | इसलिए जीवन मे ऐसी भूल कभी न करें..