Sharing Knowledge from Life Experience

Knowledge Sharing from life experience ,Interesting incidents,short stories,philosophy,Legend etc.

Sunday, May 10, 2015

Experience of Earthquake

भूकम्प का अनुभव 

मैंने अब तक दो बार भूकम्प का अनुभव किया है एक बार तब जब मैं  अहमदाबाद में था । तारीख थी जनवरी २७,२००१। मैं  अखबार पढ़ रहा था अचानक अक्षर हिलते हुए दिखाई दिए मैंने सोचा क्या नजर कमजोर हो रही है फिर देखा टीवी हिल रहा है तो सोचा कही चक्कर तो नहीं आ रहा है फिर देखा बिस्तर भी हिल रहा है मैंने कहा अब तो ये कुछ और ही है ।
तब तक भैया बोले भागो लगता है भूकम्प आ गया । मैं 4th  फ्लोर पर था लगा तेजी से भागने छत पर पानी का पाइप टूट गया खूब तेज पानी के गिरने की आवाज आने लगी ऐसा लगा जैसे बिल्डिंग गिरने वाली है । मै  १० सीढ़िया एक साथ कूदकर भागने लगा और अंततः नीचे पहुंच गया ।

नीचे से साड़ी बिल्डिंगों को हिलते हुए देख रहा था देह में कम्पन हो रहा था नीचे पहुचने वालों में मैं  पहला व्यक्ति था धीरे धीरे सभी बहार आ गए । कोई तोलिये में लिपटा  था तो कोई केवल अंडरवेर  में था । थोड़ी देर बाद भूकम्प शांत हो गया ।

फिर लोग अपने अपने एक्शन की गुफ्तगूं करने लगे । एक अंकल तो बोले मैं  पूजा कर रहा था जब भूकम्प  आया तो ऐसा लगा कि  भगवान प्रसन्न हो गए है  और दर्शन देने वालें है लेकिन जब लोगों की आवाज सुनी तो पता चला चला मशला कुछ और ही है ।

ऐसे ही दूसरा भूकम्प का अनुभव इस बार लखनऊ में रहा २५ अप्रैल २०१५ एक और यादगार दिन योँ तो मैं  मुंबई में नौकरी करता हूँ पर बच्चों को लेकर गावं आया था । २५ अप्रैल २०१५ एक रिलेटिव लखनऊ में भर्ती थे उनको देखने के लिए लखनऊ के एक अस्पताल में रुका था । अबकी बार सेकंड फ्लोर पर था
जब भूकम्प आया तो सीढ़ियों की तरफ भगा लेकिन मैं  जिस सीढ़ी से भागा  वो सीढ़ी  बंद थी लगा इस बार नहीं बचूंगा पर शुक्र था भगवन का की कोई नुकसान  नहीं हुआ ।

कहते है भूकम्प आने के कई कारन है कभी हिमालय अपने  संतुलित करने के लिए हलचल करता है तो पृथ्वी ऊर्जा  निकलती है तो भूकम्प आता है ।
कुछ लोग कहतें है की पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है जब भी शेषनाग अपना फन बदलते है तो भूकम्प आता है ।

और भी अलग अलग कारण  है कुछ भी  हो भूकम्प एक तरह का मौत का अनुभव है जो की खतरनाक है और भगवान का दिया हुआ एक इंजेक्शन होता है जो कई को निगल जाता है और कई लोगों को सुधार  देता है ।

Thursday, April 23, 2015

Different thoughts

अलग अलग विचारधारा

हमारा देश भारत अलग अलग विचारधाराओं से ओतपोत है । कभी हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था और ये गुलामी कई सालों से थी परन्तु आज लोगों की विचारधारा यही है देश को आजादी महात्मा गांधी या भगत सिंह या फिर चंद्रशेखर आजाद जी ने दिलाई थी परन्तु  मेरी तो विचारधारा ये कहती है की हमें सिर्फ कुछ नामों तक सीमित नहीं रहना चाहिए हमें उन सभी लोगों को भी साथ लेकर बोलना चाहिए जिन्होंने कही न कही कभी न कभी कुछ सहयोग दिया ।

कुछ के नाम तो गुमनाम ही रहे । अंग्रेजो से बहुत लम्बी लड़ाई चली कभी महारानी लक्ष्मीबाई लड़ी तो कभी टीपू सुल्तान तो कभी हैदर अली ।  योँ तो पूरा इतिहास आजादी की लड़ाई से भरी पड़ी है कभी अंग्रेजो से लड़ाई तो कभी मुगलों से । सहीद तो आज भी जवान कश्मीर में हो रहे हैं उनका भी योगदान इस देश के लिए काम नहीं है ।

कभी मंगल पाण्डेय ने आजादी की बिगुल बजाई थी तो उनको भी आजादी का श्रेय जाता है तो हम केवल एक दो नामों को लेकर अलग अलग विचारधारा क्यों रखते है । हर देश प्रेमी जो देश के लिए सहीद हुआ वो इस देश की आजादी की एक कड़ी है हमें आजादी के लिए एक दो नाम की जगह सभी के नामो के साथ एक कॉमन सब्द का उपयोग करना चाहिए ।

आज कुछ गंदे राजनीतिकारों ने देश को गन्दा कर रखा हम नौजवानो की जिम्मेदारी है की हम अपने देश की आजादी को बरक़रार रखें और जरुरत पड़ने पर गन्दी राजनीती और सिस्टम को उखाड़ फेंके।

जो स्वार्थी है वो देशभक्त नहीं हो सकता बलिदान ही देशभक्ति की पहचान है बलिदान और कुछ नहीं अपनी इच्छा शक्ति है जिसमे बलिदान की भावना हो । 

Tuesday, March 3, 2015

Holika Dahan vs Swine Flu

Holi 2015



















होलिका दहन 

हम पूरे भारत में होली का त्यौहार मानते है और कई जगह पर होलिका जलती है । होली क्यों मनाते है ये तो हम सभी लोग जानते है पर इससे क्या लाभ है ये सायद बहुत कम लोग जानते है । जब होलिका जलाई जाती है तो उसका धुवाँ वॉयमंडल  में जाता है और उस वॉयमंडल  में बहुत से वायरस होते हैं । उस धुवे से बहुत सारे वायरस मर जाते है । और इस बार तो स्वाइन फ्लू नाम का वायरस बहुत ज्यादा फ़ैल गया है तो मेरा सभी भाई से निवेदन है इस बार होलिका में कपूर और इलाइची अधिक से अधिक जलाएं ताकि स्वाइन फ्लू का वायरस हमेशा के लिए मर जाये । 

क्यों की अभी तक कपूर और इलाइची ही एक मात्र दवा है स्वाइन फ़्लुए से बचने का । 

पहले ज़माने में लोग यज्ञ करते थे और यज्ञ में बहुत सारा घी  और चन्दन , कपूर,इत्यादि जलाते थे तो वॉयमंडल  शुद्ध रहता था पर आज का वातावरण बहुत ही दुसित हो चूका है और यज्ञ बहुत कम होता है  आओ हम सब मिलकर एक बार फिर से वॉयमंडल  को शुद्ध  करें और अपनी सुरक्षा को सुनश्चित करें । 

होली एक मौका है अपने तन और वॉयमंडल  को शुद्ध  करने की।  होली की सभी मित्रो को हार्दिक सुबह कामनाएं । 

Wednesday, February 4, 2015

Swine flu home Remedy

I got good information for Swine flu home Remedy. You can try if you are facing swine flue.

Swine flu home Remedy

Tuesday, February 3, 2015

Why Monopoly is required

मोनोपोली क्यों जरूरी है

अगर जिंदगी में आप खूब पैसा कामना चाहते है तो एक तरीका है और वो तरीका है मोनोपोली । अगर आप कोई बिज़नेस करने जा रहे है तो जिस प्रोडक्ट में मोनोपोली  होगी तो प्रोडक्ट ज्यादा बिकेगा । 

मोनोपोली  के मैंने बहुत सारे उदाहरण देखे है ।परन्तु एक घटना के बारें में मै  लिखना चाहता हूँ | 
एक बार मै  उदयपुर राजस्थान गया हुआ था । 
एक बाजार में दो दूकान थी और दोनों दुकान में कचौरी बिक रही थी परन्तु एक दूकान में खूब भीड़ थी दूसरी दूकान में सिर्फ १ या २ ग्राहक थे । 

मैंने कहा चलो में दोनों दूकान की कचौरी खाता है पहले में काम भीड़ वाली दुकान पर गया कचौरी खाई कचौरी ताज़ी और स्वादिस्ट थी फिर में दूसरी दूकान पे गया जहाँ ज्यादा भीड़ थी बड़ी देर बाद कचौरी खाने का नंबर आया कचौरी खाने के बाद पता चला की दोनों दूकान की कचौरी का स्वाद तो एक जैसा था फिर वहां भीड़ ज्यादा यहाँ काम क्यों । 

फिर थोड़ी देर बाद भीड़ वाली दूकान ने पीने के लिए पानी दिया तब पता चला की अंतर क्या है । दूकानदार ने जो पानी दिया था वो हींग का ठंडा पानी था जो गैस को मार देता है । 

मैंने कहा धन्य है दूकानदार का दिमाग ।  अब तो आप समझ ही गए होंगे की मोनोपोली क्यों जरूरी है । 

Sunday, January 11, 2015

First Trip to Mumbai

train to mumbai










मुंबई की पहली यात्रा 

मैं  अहमदाबाद में नौकरी करता था । अचानक एक दिन मुझे इंटरव्यू के लिए मैसेज आया । मैंने इंटरव्यू के लिए तैयारी शुरू कर दिया  । फिर मैंने टेक्निकल इंटरव्यू फ़ोन पर अटेंड किया । फिर कुछ दिन बाद फाइनल सिलेक्शन का कॉल आया । 

डेट फिक्स हो गयी अप्पोइंटमेंट की । ट्रैन टिकट बुक कर लिया  और धीरे धीरे वो शुभ दिन आ गया जिस दिन मुझे मुंबई जाना था ।  निकलने से पहले भाई ने पुछा ट्रैन कितने बजे की है मैंने बोला ९. ३० बजे रात की। . भाई ने बोला टिकट चेक कर लिया।  मैंने बोला चेक कर लिया।  

में सामान लेकर स्टेशन पहुंच गया पूरे ८. ३० बजे । अपने ट्रैन का टाइम चेक करने लगा और फिर चौक गया ट्रैन टाइम तो ८. ३० बजे ही था । देखा मेरी ट्रैन तो जा रही है । सामान भरी था मैं कोसिस करके भी ट्रैन पकड़ न सका । 

फिर भी अगले सुबह पहुचना जरुरी था । तो दूसरी ट्रैन में बैठ गया टीटी  आया तो ६०० रूपये का फाइन भरना पड़ा । खड़े खड़े किसी तरह से मुंबई पंहुचा फिर भाई को फ़ोन किया की ठीक ठाक पहुंच गया । 

पर मुसीबत अभी बाकी थी । बांद्रा से विक्रोली लोकल ट्रैन का टिकट लिया पर फर्स्ट क्लास में बैठ गया । जब उतरा तो टीटी ने पकड़ लिया और फिर ८०० रूपये का फाइन ले के छोड़ दिया । 

इतना सब होने  के बाद भी अपॉइंटमेंट मिस नहीं किया पर मुझे मुंबई का फर्स्ट ट्रिप याद रहेगा हमेशा । 

Wednesday, December 3, 2014

Bechaara Ujla aur Uska mitra Chandu

बेचारा चंदू 

चंदू ६ साल  का बच्चा था । चंदू  का बचपन बहुत ही  मुश्किलों  भरा था ।  चंदू   के चाचा बहुत क्रूर किस्म के इंसान थे । यूं  तो चंदू   की कई कहानिया है पर मै  एक लेख में एक वाक्यां  ही लिखता हूँ बाकी दुसरे लेख में । 

चंदू ने एक  कुत्ते का बच्चा पाल रखा था उसका नाम था उजला ।  एक बार गलती से उजले ने चाचा की एक किताब फाड़ दी तो चाचा को बहुत गुस्सा आया उन्होंने चंदू को डंडे से खूब पिटाई की । चंदू कभी इधर भागे कभी उधर । और चाचा जी को जब भी उजला दिखाई देता एक डंडा ताड से पड  जाता था । 

चंदू  बेचारा छोटा होने के कारन कुछ न बोल पाता था ।  बस मजबूरी में रोता रहता था । एक दिन तो हद हो गई चंदू के चाचा जी ने एक मोटा सा डंडा उजले के सर पर दे मारा ।  चंदू  को लगा अब तो उजला मर जायेगा । उजला खूब जोर से चिल्लाया और बेहोस हो गया । 

चाचा जी ने सोचा की सायद मर गया चलो अच्छा हुआ ।  फिर चाचा खेत में चले गए चंदू  दौड़ के उजला के पास आया और उसके पास उसको छू  कर देखा तो उजला जिन्दा था । चंदू  ने जल्दी से उसको दवा लगाया और दूध में हल्दी दाल कर पिला दिया ।  २ से ३ सप्ताह में उजला ठीक हो गया । चंदू  ने भगवान को धन्यवाद कहा ।  और उजले को पड़ोस में दे दिया चंदू  ने सोचा उजले को बचने का यही एक तरीका है ।  चंदू रोज उजले से मिलने जाता और उसके साथ खेलता । आज चंदू ३० वर्ष का हो गया पर फिर भी वो घटना याद आता तो उसे दुःख होता । 

ऐसे न जाने कितने उजले रोज अत्याचार के शिकार हो रहे है उनकी सुध लेने वाला कोई चंदू नहीं है । 

Saturday, November 22, 2014

Municipality Office-Story of correction in Birth Certificate

मुन्सिपलिटी ऑफिस 

मैं  आप लोगों से १ घटना बताना चाहता हूँ जो हाल ही में घटित हुई मुझे मेरे बेटे की जन्म सर्टिफिकेट में एक सुधार करवाना था स्लैश के जगह पर १ हो गया था     ।  मै  पूरी बातें लिखता हूँ विस्तार से । 
मुन्सिपलिटी अफसर - क्या काम है । 
मैं  - सर एक करेक्शन करवाना है । 
मुन्सिपलिटी अफसर - ठीक है दिखाओ । 
मै - ये लीजिये सर । 
मुन्सिपलिटी अफसर - कल आ जाओ रिकॉर्ड चेक करके बताऊँगा । 

अगले दिन में फिर गया । 

मुन्सिपलिटी अफसर -  देखो मैंने रिकॉर्ड चेक कर लिया है फॉर्म में गलती थी । हॉस्पिटल वालों ने गलत लिख दिया था । 
मैं - ठीक है सर तो अब करेक्ट कर दीजिये । 
मुन्सिपलिटी अफसर -  ठीक  है पर एक तुम्हारा पासबुक और तुम्हारी   पत्नी के बैंक   पासबुक का ज़ेरोक्स लगेगा । कल ले के आ जाओ । 

मै  घर आ गया पता चला वाइफ का तो बैंक अकाउंट ही नहीं है फिर मैंने वाइफ का तो बैंक अकाउंट खुलवाया । 

और एक सप्ताह के बाद फिर गया मुन्सिपलिटी ऑफिस। 

मैं -  सर , लीजिये  सभी डॉक्यूमेंट के साथ फॉर्म रेडी है । 

मुन्सिपलिटी अफसर - पर आज बड़े साहब छुट्टी पर है सोमवार को आ जाओ । 

फिर मैं  बहुत परेशान हो गया और सोमवार को गया । 

मुन्सिपलिटी अफसर - अरे आज आप आ गए साहब तो आज भी नहीं आये । 

मैं - सर, प्लीज आज करवा दीजिये न । 

मुन्सिपलिटी अफसर -  देखो वो सब ठीक है अगर कंप्यूटर ऑपरेटर को चाय पानी दूँ तो सायद हो जाये । 

मैं -  ठीक है सर ले लीजिये पर करवा दीजिये मैं  पहले से ही कई लीव ले चूका हूँ । 

फिर मुन्सिपलिटी अफसर मुझे दूसरे कमरे में ले गया  

मुन्सिपलिटी अफसर - देखो ३०० रूपये लगेंगे । 

पर मेरे पास ५०० का नोट था मैंने दिया तो उसने सारा रख लिए मांगने पर भी २०० रूपये वापस नहीं किये । 

पैसे लेने के बाद भी दो दिन बाद मेरा काम हुआ । 

जब मैंने अपने छुटटी और किराया भाड़ा जोड़ा तो पुरे ५००० रूपये का नुकसान हो चूका था केवल एक स्लैश करेक्शन  के लिए । ये तो है मुन्सिपलिटी और सरकारी ऑफिस का हाल । ये वाकया मुंबई का  है ।  अगर आप ये लेख पढ़ेंगे तो हो सकता है आप के कुछ पैसे बच जाएँ । अगर आप को  जरूरत पड़े तो यदि पैसे  देने हो तो पहले दिन ही  दे देना  नहीं तो तो कानून का सहारा ले । । पर कानून भी तो सरकारी है । आम आदमी जाये  कहा ।

Sunday, October 26, 2014

Deewali me Diwala

दिवाली में दिवाला 

दिवाली  हिन्दुओं का विशेष त्यौहार है । दिवाली की छुट्टी का इंतजार  सभी को रहता है । परन्तु आज की डेट में इंसान की दिवाली का दिवाला हर  तरफ से निकल जाता है ।  आप कहोगे कैसे वो ऐसे पहले तो जो  दूर रहते है उनको ट्रैन की टिकट की दिक्कत । टिकट बुकिंग स्टार्ट होते ही ख़त्म हो जाती है और वेटिंग में यात्रा करने पर तो हाल बेहाल हो जाता है । जो अमीर है वो तो एयरोप्लेन  का टिकट ले लेते है बाकी ट्रैन में ऐसे जाते है जैसे कसाई बकरे को गाड़ी में ठूंस कर ले  जा रहा हो ।  फिर हर चीज महँगी हो गई है । 

एक फुलझड़ी का पैकेट भी १०० रुपए से कम का नहीं होता है । और १०० रूपये का मतलब किसी गरीब के एक दिन की कमाई । अगर एक गरीब इंसान दिवाली  मानना चाहे तो वो अपने आप से बैमानी  करेगा । 

बच्चों के कपडे के भाव तो आसमान छू  रहे है एक सिंपल ड्रेस १००० रूपये  की होती है । हर एक कदम खर्चे से भरे होतें । दिवाली  खुसी का त्यौहार है पर आजकल  की  दिवाली इंसान को हंसने का मौका ही नहीं देती है । 

अमीरों का तो बोलबाला रहता और गरीबो की दिवाली का दिवाला निकल जाता है । अब एक ही  रास्ता   है सरकार को महंगाई में  भी कोटा रखना चाहिए । सबका कार्ड बनाना चाहिए ।  एक वस्तु का भाव अमीर के लिए अलग और गरीब के गरीब  के लिए अलग और कम होने चाहिए । 

जो भी सभी मित्रो को मेरे विचारों के साथ दीवाली मुबारक हो । 

Thursday, September 25, 2014

How I started blogging

जब मैंने  स्नातक की डिग्री पास कर लिया तो  मैंने सोचा कि अब आगे मै क्या करूँ थोड़ा थोड़ा मुझे लिखने का भी शौक था तो कभी कभी कुछ लिख लिया करता  था मुझे लगता है फिर कुछ दिनों बाद मैंने मास्टर डिग्री कंप्यूटर में किया मैं सोचता था कि चलो कुछ इंटरनेट से पॉकेट मनी कमाने का जरिया निकला जाये तो गूगल में कुछ न कुछ सर्च किया करता था । मुझे बहुत सारी  वेबसाइट मिली पर थोड़े दिन काम करने के बाद पता चला की ज्यादातर गलत वेबसाइट थी फिर मुझे के आर्टिकल की साइट मिली वह साइट रियल थी और आर्टिकल लिखने का पैसा देती थी वहां काम करके मैंने थोड़े बहुत पैसे कमाएं पर वो बहुत कम  होते थे  उसके बाद मैंने गूगल ऐडसेंस के बारे में सुना तो ब्लॉग लिखकर अप्लाई कर दिया परन्तु गूगल ने मेरे साइट्स को रिजेक्ट कर दिया । 

इस तरह कई बार अप्लाई करने पर अंततः सफलता हाथ लगी और तब से मेरा उत्साह बढ़ गया आज तक में ब्लॉगिंग के काम को आगे बढ़ा रहा हूँ और मुझे लगता है की एक दिन सफलता बढ़ेगी और मेहनत का फल मिलता जायेगा । 

पहले तो एक ब्लॉग साइट से सुरुवात की पर धीरे धीरे ७ ब्लॉग साइट खोल लिए उसमे से एक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग ,दूसरी माइक्रोसॉफ्ट अक्सेप्टा तीसरी बुकमार्क्स,चौथी  बॉलीवुड , पाचवी भगवन  इत्यादि साइट्स है । 

आसा है की आप लोगों को पोस्ट पसंद आये होंगे।  ऊपर सभी साइट्स के लिंक दिए गए है आप विजिट कर सकते ।