Sunday, September 25, 2016

सरोज एक संघर्ष

सरोज

सरोज एक संघर्ष का  नाम था ? सरोज एक लड़की थी जिसकी शादी के १ साल ही हुए थे और उसके पति की डेथ हो गई थी । सरोज अब टूट सी गई थी । अडोस पड़ोस  के लोगों  ने समझाया जिंदगी जीने  के लिए है उसे जाया मत करो ।

सरोज १० वी  पास थी तो उसने अपनी पढाई फिर से शुरू की किसी तरह से १२ वी  की परीक्षा पास की फिर टीचींग  का कोर्स कर लिया और एक दिन अध्यापिका बन गई  ।

जिंदगी अब कुछ अच्छी  लगने लगी । घर में कोई जेंट्स नहीं था और सभी बहनो की शादी  थी । खेती भी थी । सरोज की एक बहन की ४ बेटी थी । सरोज की बहन का नाम सुमित्रा था ।

सुमित्रा का पति जुवारी था एक दिन वो सब कुछ जुए  में हार गया । तो सुमित्रा भी सरोज के साथ रहने लगी एक दिन सुमित्रा के पति की भी डेथ  हो गई  क्योंकि उसे कैंसर हो गया था ।

अब सरोज ने सुमित्रा और उसकी बेटियों की जिम्मेदारी अपने सर  ले लिया । सबको पढ़ाया लिखाया और धीरे धीरे ३ बेटियो की शादी भी करवा दी ।   सरोज अब नौकरी से रिटायर हो गई  थी ।

उसकी अब एक ही इच्छा बाकी थी की किसी तरह से चौथी बेटी की शादी कर दूं मरने से पहले । लेकिन किस्मत को कुछ  और ही मंजूर था एक दिन सरोज के पेट में जोर से दर्द होने लगा आनन् फानन में अस्पताल में भर्ती किया ।

लेकिन हालत बिगड़ती जा रही थी सरोज की इच्छा थी की सारी जायदाद सुमित्रा के नाम कर दूं तो कम से कम  उसकी बेटी की शादी तो हो जाएगी ।  वसीयत की तैयारी होने लगी । कागजात तैयार हो गए लेकिन सिगनेचर  से पहले ही सुमित्रा की डेथ हो गयी ।

उसके मरने के बाद ३ से ४ लोगों ने प्रॉपर्टी पर अपना दावा किया हुआ है  अभी तक कोई फैसला  नहीं हुआ । सुमित्रा की लड़ाई मरने  के बाद भी चल रही है ।  आगे क्या होगा भगवान् जाने । 

Sunday, July 17, 2016

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Thursday, June 30, 2016

करे कौन भरे कौन

करे कौन भरे कौन

मेरे  गांव  के पास ही एक दूसरा गांव  था उसका नाम लालपुर था । लालपुर में एक लाला जिसका नाम था जीवन । जीवन  के २ बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की । दोनों की उम्र ६ और ९ साल की थी । एक दिन जीवन का बेटा  खेल रहा था और खेलते खेलते वो एक जीप में बैठ गया जो रुकी हुई थी । बेटे का नाम  ननकू था । ननकू  छुपम  छुपाई खेल रहा था इसलिए जीप में छुप गया था ।  लेकिन थोड़ी देर में ननकू को नींद लग गई और वो सो गया । जब उसकी आँख खुली तो जीप चल रही थी ।

इधर लालपुर मे जीवन अपने बेटे को ढूँढने लगा लेकिन काफी ढूंढने पे  भी ननकू कहीं नजर नही अाया तो समझ अाया की लगता है की ननकू खो  गया |
१ दिन  बीत गया पुलिस मे रिपोर्ट भी की लेकिन कुछ भी पता न चला |

ननकू के माता पिता परेशान हो गया |  उसी गाँव  मे एक बाबा रहता था उसका बड़ा नाम था | बाबा का नाम मिस्त्री बाबा था | लोगो ने जीवन को मिस्त्री बाबा के पास् जाने की सलाह दी | असल मे मिस्त्री बाबा ने जिनः सिद्धि की थी | उस जिन की मदद से सबका दुख दूर करते थे | जीवन मिस्त्री बाबा के पास गया औॉर अपना दुख बताया |

मिस्त्री बाबा बोले की मै बता तो सकता हूँ की तुम्हारा बेटा कहां है परंतु तुम्हे कल ५ किलो मिठाई देनी होगी |  जीवन  ने मिठाई देने का वादा किया फिर मिस्त्री बाबा ने बताया तुम्हारा बीटा नदी के उस पार्  गाँव   मे है | जीवन  उस पार के गाँव   मे गया सचमुच उसका बेटा वही था एक चाय  वाले की दुकान के पास् बैठा था |
जीवन के खुशी का ठिकाना न था बेटे को लेके घर अा गया | पूजा पाठ किया भगवान को मिठाई चढ़ाई लेकिन मिस्त्री बाबा ५ किलो मिठाई देना भूल गया |
उधर मिस्त्री बाबा उसका इंतजार करते रहे लेकिन १० दिन  बीत जाने के बाद भी मिठाई नही मिली तो मिस्त्री बाबा की मृतुय हो गई |
एक छोटी से भूल ने उनकी जान ले ली | इसलिए जीवन मे ऐसी भूल कभी न करें.. 

Thursday, May 19, 2016

Moh Effect and Side effect in life

मोह

इस दुनिया में हर किसी को किसी न किसी वस्तु  से मोह है । किसी को बहुत सारी  चीजों का मोह तो किसी को कुछ चीजों का ।  देखा जाये तो हम हर वक्त मोह से घिरे रहते है । जिसे ज्यादा मोह वो जाता है वो भी दुखी रहता है और जो वैरागी है वो दूसरों के मोह से दुखी रहता है ।

एक माँ जो की अपने बच्चे से कितना ज्यादा मोह  करती है और अपने दिल में प्यार को महसूस करती है उसके बच्चे को कुछ भी हो तो कितना विचलित हो जाती है ।  कुछ मोह जो बिलकुल दिल से किये जाये वही  प्यार बन जाता है ।

किसी को नौकरी से मोह तो किसी को कंपनी से मोह किसी को बातों का मोह तो किसी को मोबाइल का मोह किसी को खिलौनों से मोह  तो किसी को  किताबों से मोह । जहाँ तक हम अपने शरीर से जुडी हर एक वस्तु  से मोह करते है ।

जो कपडे पहनते है सोचते है जितना ज्यादा चले उतना अच्छा है पुरानी हो जाने पर भी ठीक से रख देतें है या तो घर में पहनते है । घर में रहते रहते खिड़की से बहार देखते देखते उस खिड़की से भी मोह हो जाता है की जिंदगी के किस मोड़ तक मैं ये खिड़की देखूंगा ।  अलग अलग सोच के साथ अलग अलग मोह उपज जाते है ।

ये मोह वक्त के साथ साथ हमें कितना कमजोर कर देता है की हमें पता ही नहीं चलता है । इस संसार में प्यार मोहब्बत बना रहे इसके लिए मोह जरुरी है पर मोह उतना ही करना चाहिए जितने में हम कमजोर न पड़े या हमारे मोह का कोई गलत फायदा न उठा ले ।

इस जिंदगी में एक इंसान के जीवन में मोह के कई पड़ाव आते है सबसे बड़ा और पहला पड़ाव तो तब होता है जब पहली बार माँ को छोड़कर बेटा  या बेटी पढाई के लिए दूर जाते है ।

दूसरा पड़ाव जब इंसान की शादी  होती है और तीसरा और आखिरी बड़ा पड़ाव जब वही  मोह माया अपनी संतान दोहराती है ।  इस संसार में अगर कुछ बड़ा करना हो तो मोह को त्यागना जरूरी हो जाता है ।

बिना मोह त्याग के कुछ अच्छ हासिल करना  थोड़ा मुस्किल होता है । जब हम कही व्यस्त होते है या कुछ काम कर रहे होते है तो छडिक  समय के लिए मोह याद नहीं रहता क्यों की अगर हम मोह हर समय याद रखेंगे तो काम कैसे करेंगे ।

महाभारत में विजय हासिल करने  के लिए न जाने कितने लोगों ने बलिदान किया मोह का त्याग किया तब जाके पांडवों को विजय मिली थी इसी तरह जिंदगी भी एक जंग है और इसमें विजय प्राप्त करने के लिए मोह के साथ सामंजस्य बनाना  ही पड़ता है ।

Tuesday, May 3, 2016

Holi celebration at Godrej Hillside Mumbai

मैं  कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा हूँ जो की हमने होली में खींची थी ।  ये मेरे बेटे लवित की पहली होली है ।  पहली  चीज  हमेशा यादों में रहनी चाहिए ।  पहली होली पहला प्यार पहली तनख्वाह इतियादी हमेशा याद रहती है । 

Lavit singh

Lavit singh

avantika

saksham

saksham,avantiaka

santosh

saksham,avantiaka

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avantiaka

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